ik roz kisi gaay ke jee men ye samaaya | इक रोज़ किसी गाय के जी में ये समाया

  - Wajahat Husain Wajahat
इकरोज़किसीगायकेजीमेंयेसमाया
इंसाननेहमकोतोबुरीतरहसताया
लाज़िमहैकिइकजल्साकरेक़ौमहमारी
औरकेशरीकउसमेंहोहरअपनापराया
तज्वीज़होंइसज़ुल्मसेबचनेकेतरीक़े
हररोज़कीसख़्तीसेतोदमनाकमेंआया
कुछऔरभीगाएँजोवहाँपासथींमौजूद
उसगायनेउनसबकोभीयेभेदबताया
बसहोगईफिरजलसेकीतारीख़मुक़र्रर
उनगायोंनेइसमेंबड़ीगायोंकोबुलाया
जबकेवहाँबैठगईंसैंकड़ोंगाएँ
इकगायकोइसजलसेकासरदारबनाया
इकगायनेफिरउठकेकहासुनतीहोबहनो
इंसाननेहमकोतोबहुतनाचनचाया
अबबढ़गएहैंज़ुल्म-ओ-सितमहदसेज़ियादा
करडालाहैज़ालिमनेहज़ारोंकासफ़ाया
दानेकातोक्याज़िक्रनहींघासभीमिलती
भूकेरहेफ़ाक़ोंनेहमेंख़ूबघुलाया
इसतरहजोकमज़ोरहुएहमतोसितमहै
ज़ालिमनेक़साईसेहमेंज़ब्हकराया
मोचीकेहवालेहुईफिरखालहमारी
अफ़्सोसहैउसनेभीतोजूताहीबनाया
बसइससेज़ियादाभीहोगीकोईज़िल्लत
अफ़्सोसहैपहलेसेहमेंध्यानआया
इंसाननेकुछक़द्रकीरंजहैइसका
घीहमनेखिलायाउसेऔरदूधपिलाया
बेहतरहैकिअबछोड़देंहमउससेतअ'ल्लुक़
जंगलमेंरहेंशहरमेंकुछचैनपाया
घासऔरहरेखेतचरेंअपनीख़ुशीसे
आज़ादहोंक्यूँजानकोयेरोगलगाया
तक़रीरहुईख़त्मतोइकनीलीसीगाय
झुँझलाकेउठीऔरउसेग़ुस्साबहुतआया
कहनेलगीसुनमिरीपुर-जोशबहनसुन
इंसानकाजोज़ुल्म-ओ-सितमतूनेजताया
इंसाफ़सेदेखोतोयेहैफ़र्क़समझका
एहसानजोउसकाहैवोक्यूँदिलसेभुलाया
वोरातकोदेताहैहमेंवक़्तपेचारा
सर्दीहोतोकरताहैहमारेलिएसाया
बरसातमेंमच्छरभीउड़ाताहैधोएँसे
उसनेहमेंतकलीफ़सेऔरदुखसेबचाया
हरतरहसेकरताहैहिफ़ाज़तवोहमारी
क्याहोगयाहमनेजोउसेदूधपिलाया
जंगलमेंयेआरामयेराहतनहींहरगिज़
तौबाकरोतौबायेहैक्याजीमेंसमाया
जंगलमेंतोहैंशे'रभीचीतेभीहज़ारों
खाजाएँहमेंफाड़केकरडालेंसफ़ाया
सर्दीहोतोजंगलमेंनहींकोठरीकोई
बारिशहोतोछप्परहैकोईछतहैसाया
इंसानहमारेलिएराहतकासबबहै
बसहमनेउसेसुनलियाजोतुमनेसुनाया
अच्छीनहींनाशुक्र-गुज़ारीकीयेबातें
अफ़्सोसहैजलसेमेंयहींवक़्तगँवाया
इंसाननेकुछज़ुल्मभीहमपरकिएबे-शक
लेकिनबचाउससेकोईअपनापराया
जोअपनेहीहम-जिंसोंकेहोख़ूनकाप्यासा
क्याशिकवाअगरहमपेउसेरहमआया
बहनोमुनासिबहैकितुमसब्रकरोअब
कहतेहैंख़ुदाकोभीतोयेसब्रहैभाया
उसगायकीतक़रीरसेचुपहोगईगाएँ
फिरसबनेकहाठीकहैजोतुमनेबताया
  - Wajahat Husain Wajahat
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