abhii langar nahin daala | अभी लंगर नहीं डाला

  - Waheed Ahmad
अभीलंगरनहींडाला
तिकोनीबादबाँकीरस्सियाँढीलीनहींकीं
अभीमस्तूलअपनेपाँवकेऊपरखड़ाहै
सफ़ीनेकेभरेसीनेमें
साँसोंकाज़ख़ीरासरसराताहै
अभीहमनाक़िदानाफ़ासलेसे
अजनबीसाहिलकेतेवरदेखतेहैं
खुजूरोंकेदरख़्तोंमेंछुपीसरगोशियाँसुननेकीख़ातिर
हमनेअपनेकानज़िंदाकरदिएहैं
पहाड़ीमेंसरकते
तीर-अंदाजोंकेकारोबारपेआँखेंलगादीहैं
हमें
तुमअपनेसाहिलपर
पज़ीराईकेकिसअंदाज़केक़ाबिलसमझतेहो
येतुमपरहै
अगरतुमतीरछोड़ोगे
तोहमनेअपनीआँखोंकेसिवा
साराबदनपिघलेहुएलोहेकेपानीमेंडुबोयाहै
हमाराहाथ
तरकशकेखुलेमुँहपरधराहै
कमाँकीख़ुश्कऔरअकड़ीज़बाँतो
मुद्दतोंसेतीरचखनेकेलिएबेचैनहै
तुम्हेंयेइल्महोनाचाहिए
किहमजबअपनेतीरपे
दुश्मनकीबाएँआँखलिखतेहैं
तोबाएँआँखहोतीहै
कभीअबरूनहींहोता
येतुमपरहै
अगरतुमहमकोसीनेसेलगानेकेलिए
साहिलपेकरअपनेबाज़ूखोलदोगे
तोहमभी
फड़फड़ातेबादबाँकीरस्सियोंकोखोलदेंगे
अगरतुमतीरअंदाज़ोंकीटोलीकोपहाड़ीसेउतारोगे
तोहमभी
जिस्मसेलिपटाहुआलोहागिरादेंगे
तुम्हारेहरअमलकोहम
बड़ीईमान-दारीसे,बड़ेइंसाफ़सेरद्द-ए-अमलदेंगे
तुम्हेंयेइल्महोनाचाहिए
किआँखकेबदलेमेंआँख
औरदिलकेबदलेदिलहमाराज़ाबताहै
तुम्हाराहुस्न-ए-ज़नहै
सोचकेहरज़ाविएसेसोचना
किहमजोपानीपरखड़ेहैं
किसपज़ीराईकेक़ाबिलहैं
मगरकुछभीकरो
मद्द-ए-नज़ररखनाकिहममद्द-ए-मुक़ाबिलहैं
  - Waheed Ahmad
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy