zaeefi ki shikan-aalood chadar se badan dhaanpe | ज़ईफ़ी की शिकन-आलूद चादर से बदन ढाँपे

  - Waheed Ahmad
ज़ईफ़ीकीशिकन-आलूदचादरसेबदनढाँपे
वोअपनीनौजवाँपोतीकेसाथ
आहिस्ताआहिस्ता
सड़ककेएकजानिबचलरहाथा
गुमाँहोताथा
जैसेधूपकेकाँधेपे
छाँवहाथरक्खेचलरहीहै
चीख़तीएड़ियोंपरकड़कड़ातीहड्डियाँगाड़ेहुए
वोजिस्मकामलबाउठाएजारहाथा
अगरचेपाँवजुम्बिशकररहेथे
मगरबूढ़ीकमरइतनीख़मीदाथी
किटाँगेंझूलतीबैसाखियाँमालूमहोतीथीं
अचानकएकजीपकररुकी
लड़केनेशीशेकोउताराऔरदेखा
फूलपतलीशाख़सेलटकाहुआथा
ख़ज़ानाग़ारमेंथा
औरदहानेपरफ़क़तमकड़ीकाजालाथा
हिरनपिंजरेमेंथा
औरउसकेदरवाज़ेपरजंग-आलूदतालाथा
वोभूकेशे'रकीमानिंदलपका
औरउसलड़कीकी
नीलीकाँचमेंलिपटीकलाईपरशिकंजाकसदिया
बूढ़ेनेकंधाछोड़करअपनीकमरपरहाथरक्खे
अपनीआँखोंकोनज़रदी
औरअपनेपाँवपरटाँगेंलगालीं
बदनसालोंकीदीमककी
मुसलसलकार-फ़रमाईसेढलजातेहैं
लेकिनग़ैरतेंबूढ़ीनहींहोतीं
जानेवोहवाकातेज़झोंकाथा
याबूढ़ेपाँवकेहल्केतवाज़ुनकीढिलाईथी
फिरलड़केकेहाथोंकीदराज़ीथी
किवोबूढ़ा
बड़ीहीबेबसीकेसाथनीचेगिरगया
औरउसकेढलकेजिस्मने
कालीसड़ककेसाथटकरातेहीइकआवाज़दी
पचासीसालनीचेगिरगएथे
कभीजबज़लज़लाआए
तोउसकीझुरझुरीसीमुख़्तलिफ़'उम्रोंकेघर
गिरतेहैंऔरआवाज़देतेहैं
नएसी
मेंटमेंलिपटीनम-इमारतगिरपड़े
तोगड़-गड़ाहटफैलजातीहै
प्लाज़ामुनहदिमहोजाएतोउसकेधमाकेमें
मुसलसलचड़चड़ाहट
साथदेतीहै
मगरकोईहवेलीगिरपड़े
जिसकेदरदीवारपर
काईअँधेरागूँधकेअपनीहरीपोरोंसेमलतीहै
तोउसमेंसदियाँबोलतीहैं
औरगुज़रीसाअतोंकीकाँपतीख़ामोशियाँआवाज़देतीहैं
जबउसनेहाथसेधरतीदबाके
कोहनियोंकीआज़माइशकी
किशायदइसतरहवोउठसके
तोसिर्फ़अपनेसरकोगर्दनकासहारादेसका
बालोंकीलंबीएकलट
माथेपेमुतवाज़ीख़ुदीशिकनोंमें
छुपकरकाँपतीथी
औरकुछबालोंकोताज़ाचोटरंगींकरगईथी
तहय्युरबेबसीकेसाथ
आँखोंकीनमीमेंजज़्बहोकर
आहनीचश्मेंके
शीशोंमेंलरज़ताथा
खुलेहोंटोंमेंदाँतोंकेशिगाफ़ोंको
ज़बाँपैवंदकरतीथी
दहनकेनमकिनारे
कानकेबुन
सुर्ख़रुख़्सारोंकेबल
चाह-ए-ज़क़नकेमुँहसेलटके
तह-ब-तहगर्दनकेसिलवट
औरउनमेंडोलतेपानीकेक़तरे
सबकेसबहिलतेथे
बसरफ़्तारमेंइकदूसरेसेमुख़्तलिफ़थे
हवेलीगिरगईथी
उन्नाबीगर्दनेदीवारदरगहनादिएथे
फ़सीलेंसुरमईतालाबकेअंदरगिरीथीं
हरमदरवाज़ापाईंबाग़मेंऔंधापड़ाथा
औरउसकीकीलमेंउलझाहुआ
बारीकपर्दाहिलरहाथा
  - Waheed Ahmad
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