ham ko waiz na baagh-e-iram chahiye | हम को वाइज़ न बाग़-ए-इरम चाहिए

  - Wafa Niyazi
हमकोवाइज़बाग़-ए-इरमचाहिए
एकउनकीनिगाह-ए-करमचाहिए
दहरहोयाकिकाबाहोबुत-ख़ानाहो
कुछभीहोमुझकोअपनासनमचाहिए
दिलहमेशाहीजिसमेंउलझतारहे
उनकीज़ुल्फ़ोंकेवोपेच-ओ-ख़मचाहिए
जिसमेंअपनेसनमकातसव्वुरहो
वोख़ुशीचाहिएऔरग़मचाहिए
उनकीबख़्शिशकाकोईठिकानानहीं
दामन-ए-मासियतअपनानमचाहिए
चश्म-ए-मयगूँसेजिसकीमैंसरशारहूँ
हाँमुझेवोहीपीर-ए-हरमचाहिए
  - Wafa Niyazi
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