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Vivek Chaturvedi
shaheedon ke shahaadat ko ha
shaheedon ke shahaadat ko ha | शहीदों के शहादत को हमें याद रखना है
- Vivek Chaturvedi
शहीदों
के
शहादत
को
हमें
याद
रखना
है
हमें
यानी
वतन
को
अपनें
आज़ाद
रखना
है
- Vivek Chaturvedi
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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मोहब्बत
की
तो
कोई
हद,
कोई
सरहद
नहीं
होती
हमारे
दरमियाँ
ये
फ़ासले,
कैसे
निकल
आए
Khalid Moin
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सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
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इस
ज़माने
में
भी
इक
लड़का
तुम्हें
यूँँ
चाहता
है
अपने
रब
से
वो
तुम्हारी
जैसी
बेटी
माँगता
है
तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
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Harsh saxena
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खाक
हो
जाएँगे
हम
खाक
में
मिल
कर
तेरी
तुझ
सेे
रिश्ता
न
कभी
अरज़े
वतन
टूटेगा
Hashim Raza Jalalpuri
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फिर
नए
साल
की
सरहद
पे
खड़े
हैं
हम
लोग
राख
हो
जाएगा
ये
साल
भी
हैरत
कैसी
Aziz Nabeel
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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उस
मुल्क
की
सरहद
को
कोई
छू
नहीं
सकता
जिस
मुल्क
की
सरहद
की
निगहबान
हैं
आँखें
Unknown
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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बहुत
मुश्किल
है
कोई
यूँँ
वतन
की
जान
हो
जाए
तुम्हें
फैला
दिया
जाए
तो
हिन्दुस्तान
हो
जाए
Kumar Vishwas
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तराशा
गया
था
गली
से
उठाकर
वो
पत्थर
जो
अब
तो
ख़ुदा
हो
चुका
था
Vivek Chaturvedi
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मैं
आदत
से
बीमार
लगने
लगा
था
किसी
का
मैं
अब
प्यार
लगने
लगा
था
जिसे
घर
बसाना
था
जानें
ये
फिर
क्यूँ
मैं
उसको
भी
दीवार
लगने
लगा
था
मेरी
दुश्मनी
की
हदें
देखकर
अब
मैं
दुश्मन
को
भी
यार
लगने
लगा
था
रहा
उनके
झगड़े
पे
मैं
चुप
हमेशा
सो
उनको
तरफदार
लगने
लगा
था
तवज्जो
ने
मेरी
बिगाड़ा
था
शायद
जो
लड़का
समझदार
लगने
लगा
था
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Vivek Chaturvedi
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दिल
नहीं
है
मेरा
हर
किसी
के
लिए
वक़्त
मुझको
नहीं
आशिक़ी
के
लिए
इक
तेरी
चाह
है
हर
किसी
को
मगर
तू
बनी
तो
नहीं
हर
किसी
के
लिए
अब
भरोसा
कहाँ
है
किसी
का
यहाँ
ख़तरा
है
आदमी
आदमी
के
लिए
मौत
से
सामना
रोज़
होता
है
अब
रोज़
मरता
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
के
लिए
दरिया
हूँ
और
प्यासा
भी
हूँ
यानी
ये
ख़ुद
सबब
हूँ
मैं
अपनी
कमी
के
लिए
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Vivek Chaturvedi
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अभी
दूर
हैं
जितने
ही
पास
थे
हम
कि
दुश्मन
हैं
अब
जो
कभी
ख़ास
थे
हम
रखा
दूर
हमने
उसे
अपने
दिल
से
उसे
भी
तो
आते
कहाँ
रास
थे
हम
दिखाकर
ये
तस्वीर
इक
दिन
कहेंगें
ये
है
दोस्त
मेरा
यहीं
पास
थे
हम
अलग
पहले
उसने
रखा
सब
सेे
मुझको
मुझे
फिर
उसी
ने
कहा
ख़ास
थे
हम
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Vivek Chaturvedi
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आईने
को
रख
दिया
,उनके
चेहरे
के
सामने
यानी
हाज़िर
किया,
अपनी
जाँ
उनके
सामने
Vivek Chaturvedi
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