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Vivek Chaturvedi
KHud ke andar dafn hooñ main
KHud ke andar dafn hooñ main | ख़ुद के अंदर दफ़्न हूँ मैं
- Vivek Chaturvedi
ख़ुद
के
अंदर
दफ़्न
हूँ
मैं
ख़ुद
के
अंदर
मर
चुका
हूँ
- Vivek Chaturvedi
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दफ़ा
इक
ख़ुद-कुशी
तो
कर
चुका
है
मिरा
दिल
तुझपे
ही
तो
मर
चुका
है
तिरे
ख़ातिर
नहीं
दिल
में
जगह
अब
जहाँ
से
ही
मिरा
दिल
भर
चुका
है
मिलो
अब
ज़िंदगी
इस
सेे,
कि
तेरा
दिवाना
इक
दफ़ा
तो
मर
चुका
है
करे
अब
दोस्ती
हम
कहता
है
वो
जो
मुझ
सेे
दुश्मनी
तो
कर
चुका
है
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Vivek Chaturvedi
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दिल
नहीं
है
मेरा
हर
किसी
के
लिए
वक़्त
मुझको
नहीं
आशिक़ी
के
लिए
इक
तेरी
चाह
है
हर
किसी
को
मगर
तू
बनी
तो
नहीं
हर
किसी
के
लिए
अब
भरोसा
कहाँ
है
किसी
का
यहाँ
ख़तरा
है
आदमी
आदमी
के
लिए
मौत
से
सामना
रोज़
होता
है
अब
रोज़
मरता
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
के
लिए
दरिया
हूँ
और
प्यासा
भी
हूँ
यानी
ये
ख़ुद
सबब
हूँ
मैं
अपनी
कमी
के
लिए
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Vivek Chaturvedi
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ग़लत
वो
था
तो
मैं
उसे
कैसे
कहता
उसे
पहले
ही
मैं
ज़ुबाँ
दे
चुका
था
Vivek Chaturvedi
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वो
लोग
सब
के
सब
हमारे
लोग
हैं
जो
भी
मोहब्बत
के
ही
मारे
लोग
हैं
हम
अपने
जानिब
से
अकेले
हैं
मगर
दुश्मन
के
जानिब
भी
हमारे
लोग
हैं
काफ़ी
हैं
आँखें
ये
किसी
के
क़त्ल
को
ये
लोग
हाए
कितने
प्यारे
लोग
हैं
हैरत
है
प्यासे
कैसे
रह
जाते
हैं
वो
जो
भी
समुंदर
के
किनारे
लोग
हैं
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Vivek Chaturvedi
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कितनें
शिद्दतों
से
अपने
फ़र्ज
को
निभाता
है
आईना
जितना
तोड़ते
हैं
उतने
चेहरे
,दिखाता
है
आईना
Vivek Chaturvedi
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