hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Vishal Vishesh
mere paas khone ko kuchh bhi nahin hai
mere paas khone ko kuchh bhi nahin hai | मेरे पास खोने को कुछ भी नहीं है
- Vishal Vishesh
मेरे
पास
खोने
को
कुछ
भी
नहीं
है
फ़लक
की
है
चादर
तो
बिस्तर
ज़मीं
है
ज़माने
से
मुझको
कोई
भी
तवक़्क़ो
नहीं
थी
नहीं
थी
नहीं
है
नहीं
है
हमेशा
रहेंगे
जो
मिलने
से
क़ासिर
हमारे
हैं
दो
लब़
तुम्हारी
जबीं
है
- Vishal Vishesh
Download Ghazal Image
जहाँ
पर
आज
मेरा
सर
लगेगा
वहीं
कल
मील
का
पत्थर
लगेगा
खुलेंगी
कब
तुम्हारी
नर्म
बाहें
यहाँ
पर
कब
मेरा
बिस्तर
लगेगा
कहा
था
उसने
मेरा
लम्स
क्या
है
पता
ये
फूल
को
छूकर
लगेगा
ये
गुल
गमले
में
तो
अच्छा
है
लेकिन
तुम्हारे
कान
में
सुन्दर
लगेगा
मुक़द्दर
का
सफ़ीना
दर
बदर
है
ज़मीं
से
कब
मेरा
लंगर
लगेगा
करेंगे
कब
मुझे
अहबाब
तस्लीम
ख़ुदारा
कब
मुझे
घर
घर
लगेगा
ख़ुदा
के
ख़ौफ़
से
बहकाने
वाले
कभी
तुझको
भी
कोई
डर
लगेगा
Read Full
Vishal Vishesh
Download Image
0 Likes
इक
झलक
में
कैसे
दुनिया
देखते
काश
उसको
हम
दुबारा
देखते
इस
कटी
मिट्टी
में
क्या
लुत्फ़े
नज़र
बाढ़
से
पहले
किनारा
देखते
अब
तरफ़दारी
बहुत
ही
आम
है
आप
भी
अपना
पराया
देखते
लौट
कर
अब
आए
हो
अब
क्या
बचा
पहले
आ
जाते
तो
जलवा
देखते
धूप
को
चादर
किए
चलते
रहे
कब
तलक
पेड़ों
का
रस्ता
देखते
Read Full
Vishal Vishesh
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Dua Shayari
Aam Shayari
Jeet Shayari
Badan Shayari
Revenge Shayari