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Viru Panwar
jugnoo tha aur teergii men tha
jugnoo tha aur teergii men tha | जुगनू था और तीरगी में था
- Viru Panwar
जुगनू
था
और
तीरगी
में
था
यानी
मैं
अपनी
ही
कमी
में
था
गोपियाँ
क्यूँँ
न
होती
दीवानी
प्रेम
रस
उस
की
बाँसुरी
में
था
अब
वो
ख़्वाबों
में
भी
नहीं
आता
जो
कभी
मेरी
ज़िंदगी
में
था
हाए
ये
दुख
कि
मैं
नहीं
था
यार
कोई
और
उस
की
गैलरी
में
था
प्यास
बुझती
न
ख़ुद-कुशी
होती
इतना
कम
पानी
उस
नदी
में
था
वो
तसव्वुर
में
भी
न
था
मेरा
और
किसी
का
वो
वाक़ई
में
था
वो
मज़ा
यार
नौकरी
में
कहाँ
जो
मज़ा
यार
शा'इरी
में
था
- Viru Panwar
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सारे
रिश्ते
फ़ुज़ूल
जाते
हैं
भूलने
वाले
भूल
जाते
हैं
ये
ख़बर
आई
है
कि
उस
गली
में
तोहफ़े
में
अब
भी
फूल
जाते
हैैं
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Viru Panwar
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दिल-लगी
अपने
बस
की
बात
नहीं
शा'इरी
अपने
बस
की
बात
नहीं
अच्छा
होगा
कि
मौत
आ
जाए
ज़िंदगी
अपने
बस
की
बात
नहीं
मुझ
से
तू
रिश्ता
रखना
दोस्ती
का
आशिक़ी
अपने
बस
की
बात
नहीं
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Viru Panwar
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जिस
के
हम
मुंतज़िर
थे
अर्से
से
जा
चुका
दूसरे
वो
रस्ते
से
कौन
मेरी
ख़ुशी
का
दुश्मन
था
किस
ने
मुझ
को
बचाया
मरने
से
उस
से
तुम
बातें
करते
रहना
दोस्त
बात
बनती
है
बात
करने
से
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Viru Panwar
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वही
ख़्वाब
था
बस
मोहब्बत
मेरी
नहीं
बन
सका
जो
हक़ीक़त
मेरी
कोई
तो
निकालो
मुझे
क़ब्र
से
उसे
देखनी
है
ये
सूरत
मेरी
वो
तो
दूर
से
ही
नज़र
आता
है
ये
और
बात
कम
है
बसारत
मेरी
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Viru Panwar
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अपनी
आँखें
आँसुओं
से
धोने
वाले
कितने
ख़ुश
हैं
तेरे
ग़म
में
रोने
वाले
आशिक़ी
करने
लगे
हम
से
भी
पहले
ये
हमारे
बाद
पैदा
होने
वाले
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