farz-e-supurdagi men taqaze nahin hue | फ़र्ज़-ए-सुपुर्दगी में तक़ाज़े नहीं हुए

  - Vipul Kumar
फ़र्ज़-ए-सुपुर्दगीमेंतक़ाज़ेनहींहुए
तेरेकहाँसेहोंकिहमअपनेनहींहुए
कुछक़र्ज़अपनीज़ातकेहोभीगएवसूल
जैसेतिरेसुपुर्दथेवैसेनहींहुए
अच्छाहुआकिहमकोमरज़ला-दवामिला
अच्छानहींहुआकिहमअच्छेनहींहुए
उसकेबदनकामूडबड़ाख़ुश-गवारहै
हमभीसफ़रमेंउम्रसेठहरेनहींहुए
इकरोज़खेलखेलमेंहमउसकेहोगए
औरफिरतमामउम्रकिसीकेनहींहुए
हमकेतेरीबज़्ममेंबे-शकहुएज़लील
जितनेगुनाहगारथेउतनेनहींहुए
इसबारजंगउससेर'ऊनतकीथीसोहम
अपनीअनाकेहोगएउसकेनहींहुए
  - Vipul Kumar
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