moond kar bas aankh apni un manaazir ke KHilaaf | मूँद कर बस आँख अपनी उन मनाज़िर के ख़िलाफ़

  - Vineet Aashna
मूँदकरबसआँखअपनीउनमनाज़िरकेख़िलाफ़
कररहेहैंहमबग़ावतदौर-ए-हाज़िरकेख़िलाफ़
तुझतलकआवाज़मेरीजातेजातेखोगई
रास्तेसबहोगएहैंइसमुसाफ़िरकेख़िलाफ़
हौसलाजोहैतोललकारोख़ुदाकोभीकभी
क्यामिलेगातुमकोहोकरहमसेकाफ़िरकेख़िलाफ़
एकअदनादिलकेहाथोंदोनोंहैंमजबूरहम
आओथा
मेंहाथहमउसशय-ए-शातिरकेख़िलाफ़
इकतरफ़थामैंनिहत्थाइकतरफ़वोगुल-बदनइश्क़कीबाज़ीमैंहाराएकमाहिरकेख़िलाफ़
एकइककरकेसभीपुर्ज़ेउसीकेहोगए
अबबदनमेंहूँमैंतन्हाहुस्न-ए-जाबिरकेख़िलाफ़
'आश्ना'फिरख़्वाबमेंआयानहींतूरातभर
तूभीशायदहोगयाहैएकशाइ'रकेख़िलाफ़
  - Vineet Aashna
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