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Vikram Sharma
mashwara hai ye behtari ke li.e
mashwara hai ye behtari ke li.e | मशवरा है ये बेहतरी के लिए
- Vikram Sharma
मशवरा
है
ये
बेहतरी
के
लिए
हम
बिछड़
जाते
हैं
अभी
के
लिए
प्यास
ले
जाती
है
नदी
की
तरफ़
कोई
जाता
नहीं
नदी
के
लिए
आप
दीवार
कह
रहे
हैं
जिसे
रास्ता
है
वो
छिपकली
के
लिए
नील
से
पहले
चाँद
पर
मौजूद
एक
बुढ़िया
थी
मुख़बिरी
के
लिए
- Vikram Sharma
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इसी
उम्मीद
से
मैं
देखता
हूँ
रास्ता
उसका
वो
आएगा
ज़मी
बंजर
में
इक
दिन
घर
उगाने
को
Kushal "PARINDA"
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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अभी
से
पाँव
के
छाले
न
देखो
अभी
यारो
सफ़र
की
इब्तिदा
है
Ejaz Rahmani
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मेरी
जानिब
न
बढ़ना
अब
मोहब्बत
मैं
अब
पहले
से
मुश्किल
रास्ता
हूँ
Liaqat Jafri
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न
हो
क़मीज़
तो
घुटनों
से
पेट
ढक
लेंगे
ये
लोग
कितने
मुनासिब
हैं
इस
सफ़र
के
लिए
Dushyant Kumar
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आवाज़
दे
के
देख
लो
शायद
वो
मिल
ही
जाए
वर्ना
ये
उम्र
भर
का
सफ़र
राएगाँ
तो
है
Muneer Niyazi
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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ज़िंदगी
अपना
सफ़र
तय
तो
करेगी
लेकिन
हम-सफ़र
आप
जो
होते
तो
मज़ा
और
ही
था
Ameeta Parsuram Meeta
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सोचता
हूँ
कि
दिल-ए-ज़ार
का
मतलब
क्या
है
एक
हँसते
हुए
बीमार
का
मतलब
क्या
है
आप
कहते
हैं
कि
दीवार
गिरा
दी
जाए
आप
की
नज़रों
में
दीवार
का
मतलब
क्या
है
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Vikram Sharma
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मैं
तुझ
सेे
बात
करने
को
तिरे
किरदार
में
आकर
इधर
से
फ़ोन
करता
हूँ
उधर
से
बात
करता
हूँ
मैं
तेरे
साथ
तो
घर
में
बड़ा
ख़ामोश
रहता
था
नहीं
मौजूद
तू
घर
में
तो
घर
से
बात
करता
हूँ
ख़िज़ाँ
का
कोई
मंज़र
मेरे
अंदर
रक़्स
करता
है
कभी
जो
बन
में
गुल
से
या
समर
से
बात
करता
हूँ
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Vikram Sharma
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ज़ब्त
का
है
जो
हुनर
मैंने
दिया
है
तुमको
मेरी
आँखों
से
निकलते
हैं
तुम्हारे
आँसू
क्यूँँ
न
अब
हिज्र
को
मैं
इब्तिदा-ए-वस्ल
कहूँ
आँख
से
मैंने
क़बा
जैसे
उतारे
आँसू
दूसरे
इश्क़
की
सूरत
नहीं
देखी
जाती
धुँधले
कर
देते
हैं
आँखों
के
नज़ारे
आँसू
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Vikram Sharma
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मिरी
आदत
है
मैं
हर
राहबर
से
बात
करता
हूँ
गुज़रता
हूँ
जो
रस्ते
से
शजर
से
बात
करता
हूँ
मैं
तुझ
सेे
बात
करने
को
तिरे
किरदार
में
आकर
इधर
से
फ़ोन
करता
हूँ
उधर
से
बात
करता
हूँ
मैं
तेरे
साथ
तो
घर
में
बड़ा
ख़ामोश
रहता
था
नहीं
मौजूद
तू
घर
में
तो
घर
से
बात
करता
हूँ
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Vikram Sharma
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दश्त
में
यार
को
पुकारा
जाए
क़ैस
साहब
का
रूप
धारा
जाए
मुझको
डर
है
कि
पिंजरा
खुलने
पर
ये
परिंदा
कहीं
न
मारा
जाए
दिल
उसे
याद
कर
सदा
मत
दे
कौन
आता
है
जब
पुकारा
जाए
दिल
की
तस्वीर
अब
मुकम्मल
हो
उनकी
जानिब
से
तीर
मारा
जाए
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Vikram Sharma
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