aam mauqon pe na aankhoñ men ubhaare aañsu | आम मौक़ों पे न आँखों में उभारे आँसू

  - Vikram Sharma
आममौक़ोंपेआँखोंमेंउभारेआँसू
हिज्रजिससेभीहोपरतुझपेहीवारेआँसू
ज़ब्तकाहैजोहुनरमैंनेदियाहैतुमको
मेरीआँखोंसेनिकलतेहैंतुम्हारेआँसू
क्यूँअबहिज्रकोमैंइब्तिदा-ए-वस्लकहूँ
आँखसेमैंनेक़बाजैसेउतारेआँसू
दूसरेइश्क़कीसूरतनहींदेखीजाती
धुंधलेकरदेतेहैंआँखोंकेनज़ारेआँसू
आँखकीझीलसुखातीहैतिरीयादकीधूप
मरनेलगतेहैंवहाँप्यासकेमारेआँसू
बिनतेरेआँखोंकोसहराबनाबैठूँमैं
रोतेरोतेगँवादूँकहींसारेआँसू
मुझफ़रेबीकोजोतूनेयेमोहब्बतदीहै
आँखसेगिरतेहैंअबशर्मकेमारेआँसू
रातहोतीहैतोउठतीहैंज़ियादालहरें
औरजातेहैंपलकोंकेकिनारेआँसू
  - Vikram Sharma
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