na khushi mujhe hi hai vasl ki na hi hijr ka bhi malaal hai | न ख़ुशी मुझे ही है वस्ल की न ही हिज्र का भी मलाल है

  - Vikram Mishra Angadh
ख़ुशीमुझेहीहैवस्लकीहीहिज्रकाभीमलालहै
मैंहूँकौनज़ातहैक्यामिरीयहीमुख़्तसरसासवालहै
सफ़रहैयेजिसेचाहूँमैंकियेख़त्महोबिनातेरेही
तूहैहम-सफ़रतोहैठीकफिरनहींतोसफ़रयेमुहालहै
येधुआँकहाँसेहैउठरहाकहींआगतोहैलगीनहीं
तोक्यूँँजलरहेयहाँसबमगरयहीशर्तियावोसवालहै
तूहैयूँँछुपातेरीज़ुल्फ़मेंकिहोमाहछुपगयाअब्रमें
मेराआरज़ूतूहीहैसनमतिराअलहदासाजमालहै
जभीबाग़बाँहैयेकहरहाकिहैठीकसबयहाँबाग़में
तोफिरअम्नबाग़मेंक्यूँँनहींभलाकौनसायेवबालहै
  - Vikram Mishra Angadh
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