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Vikas Sahaj
marne waale ko kab ye maaloom hua hai
marne waale ko kab ye maaloom hua hai | मरने वाले को कब ये मालूम हुआ है
- Vikas Sahaj
मरने
वाले
को
कब
ये
मालूम
हुआ
है
पीछे
मंज़र
कितना
दुखदाई
होता
है
- Vikas Sahaj
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ऐ
शौक़-ए-नज़ारा
क्या
कहिए
नज़रों
में
कोई
सूरत
ही
नहीं
ऐ
ज़ौक़-ए-तसव्वुर
क्या
कीजे
हम
सूरत-ए-जानाँ
भूल
गए
Asrar Ul Haq Majaz
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जिस
शाने
पर
सर
रखते
हो
उस
शाने
पर
सो
जाते
हो
जाने
कैसे
दीदावर
हो
हर
मंज़र
में
खो
जाते
हो
Poonam Yadav
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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हस्ती
का
नज़ारा
क्या
कहिए
मरता
है
कोई
जीता
है
कोई
जैसे
कि
दिवाली
हो
कि
दिया
जलता
जाए
बुझता
जाए
Nushur Wahidi
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रोज़
बस्ते
हैं
कई
शहर
नए
रोज़
धरती
में
समा
जाते
हैं
Kaifi Azmi
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सब
यार
सोचते
थे
रहेगा
वही
समाँ
इक
मैं
ही
बस
बचा
हूँ
कोई
सौ
पचास
में
Amaan Pathan
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एक
दफ़ा
बस
वापस
मंज़र
ऐसा
हो
हाथ
मेरा
सीधा
और
उल्टा
तेरा
हो
Tanoj Dadhich
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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और
भी
दुनिया
में
मंज़र
ख़ूब-सूरत
हैं
मगर
तेरी
ज़ुल्फ़ों
झटकने
से
सुहाना
कुछ
नहीं
Alankrat Srivastava
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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खड़ी
है
देह
की
जब
तक
इमारत
बने
रहना
सदा
आधार
मोहन
Vikas Sahaj
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अँधेरों
में
भले
ही
साथ
छोड़ा
था
हमारा
मगर
जब
रौशनी
लौटी
तो
साए
लौट
आए
Vikas Sahaj
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अचानक
छोड़
कर
जाने
से
उसके
मेरी
ग़ज़लें
अधूरी
रह
गई
हैं
Vikas Sahaj
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जिस
लड़की
ने
ख़्वाब
दिखाए
शादी
के
पास
वही
लेकर
आई
बर्बादी
के
फिर
मैंने
उन
सब
से
रिश्ता
तोड़
लिया
बीच
में
आए
जो
मेरी
आज़ादी
के
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Vikas Sahaj
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उसकी
निगाह-ए-नाज़
से
आगे
निकल
गए
यानी
फ़रेब-साज़
से
आगे
निकल
गए
हम
से
भी
रोक
लेने
की
ज़हमत
नहीं
हुई
तुम
भी
हर
इक
लिहाज़
से
आगे
निकल
गए
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Vikas Sahaj
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