ye baar-e-gham utha kar dekhte hain | ये बार-ए-ग़म उठा कर देखते हैं

  - Vikas Joshi Wahid
येबार-ए-ग़मउठाकरदेखतेहैं
तुम्हेंभीआज़माकरदेखतेहैं
बड़ाहैज़ो'मइसपागलहवाको
दिएहमभीजलाकरदेखतेहैं
हैमुमकिनज़िंदगीआएसमझअब
दोबारासरखपाकरदेखतेहैं
हमारेज़ख़्मकाक्याहालहैवो
गलेहमकोलगाकरदेखतेहैं
यक़ींदुनियापेफिरहोनेलगाहै
चलोफिरचोटखाकरदेखतेहैं
पिघलतीहीनहींअश्कोंसेदुनिया
ज़रासामुस्कुराकरदेखतेहैं
मुख़ालिफ़इश्क़केतुमहोजो'वाहिद'
तुम्हारीनसदबाकरदेखतेहैं
  - Vikas Joshi Wahid
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