waqt ne jab rakh diya jazbon ko andar todker | वक़्त ने जब रख दिया जज़्बों को अंदर तोड़कर

  - Ved prakash Pandey
वक़्तनेजबरखदियाजज़्बोंकोअंदरतोड़कर
इकपरिंदाकरदियाआज़ादतबपरतोड़कर
कुछभीतोअच्छानहींबनपायामेरीेख़ाकसे
मुझकोकूज़ागरनेदेखाहैबनाकरतोड़कर
मैंकिसीऔरकाहोपायाकभीफिरउम्रभर
इश्क़नेजबरखदियाअंदरसेबाहरतोड़कर
मुफलिसीजबहदसेज़्यादाबढ़गईतोमैंअदीब
गयाफिरख़ुदसेबाहरदिलकोअंदरतोड़कर
जबकोईआतिशफ़िशाँमिलजाएतबयेपूछना
किसतरहरक्खाहैयेदुखतुमनेभीतरतोड़कर
ज़िन्दगीमुझकोतिरेहोनेपेलानतहोबहुत
जीताहूँमाँ-बापकेमैंख़्वाबकोगरतोड़कर
बातकेवलइकभरोसेकीथीवरनामेरेदोस्त
किसकोअच्छालगताहैख़ुदअपनाहीघरतोड़कर
मैंतुम्हारेजिस्ममेंउसइकजगहपरक़ैदहूँ
तुमजहाँरखतीहोख़ुदकेख़्वाबअक्सरतोड़कर
  - Ved prakash Pandey
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