shahar men jab bhi dhool udti hai | शहर में जब भी धूल उड़ती है

  - Ved prakash Pandey
शहरमेंजबभीधूलउड़तीहै
बेबसीकीहीधूलउड़तीहै
सांसलेनाभीभारीहैअबतो
मौतकीऐसीधूलउड़तीहै
अश्क़ोकीबूंदाबांदीसेपहले
तेरीयादोंकीधूलउड़तीहै
औरकुछभीनज़रनहींआता
इश्क़मेंइतनीधूलउड़तीहै
आजकलमेरेदिलमुहल्लेमें
मीरग़ालिबकीधूलउड़तीहै
ताकतेरहगएहमइकफ्रेम
आईनेसेभीधूलउड़तीहै
मेरेहोंठोसेसचनिकलताहै
सबकेचेहरेकीधूलउड़तीहै
जबभीतेराख़यालआताहै
दिलमेंहल्कीसीधूलउड़तीहै
बीतेलम्होंकीतूसबामतभेज
सूखेफूलोंकीधूलउड़तीहै
अपनीआँखेंहीबंदरखताहूँ
शहरमेंइतनीधूलउड़तीहै
मौतआनेकीहैयहीपहचान
जिस्मसेजाँकीधूलउड़तीहै
याद"कातिब"कोजबवोकरतीहैं
चेहरेसेग़मकीधूलउड़तीहै
  - Ved prakash Pandey
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