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Ved prakash Pandey
mere dil ka ishaara samjha kar
mere dil ka ishaara samjha kar | मेरे दिल का इशारा समझा कर
- Ved prakash Pandey
मेरे
दिल
का
इशारा
समझा
कर
हो
चुका
हूँ
तुम्हारा
समझा
कर
जीतने
वाले
बढ़ते
रहते
है
रुकनेवालों
को
हारा
समझा
कर
बिन
मआनी
तो
कुछ
नहीं
इस
में
लफ्ज़
को
बे-सहारा
समझा
कर
यार
ग़म
में
किसी
तरह
से
मैं
कर
रहा
हूँ
गुज़ारा
समझा
कर
गर
समुंदर
में
जीना
है
'कातिब'
तू
भँवर
को
किनारा
समझा
कर
- Ved prakash Pandey
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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हर
धड़कते
पत्थर
को
लोग
दिल
समझते
हैं
'उम्रें
बीत
जाती
हैं
दिल
को
दिल
बनाने
में
Bashir Badr
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें
इक
मश्वरा
दूँ
सादगी
से
कह
दो
दिल
की
बात
बहुत
तैयारियाँ
करने
में
गाड़ी
छूट
जाती
है
Zubair Ali Tabish
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामुशी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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ये
ग़लतफ़हमी
है
तुम्हारी
दिल
अब
कि
वो
लड़की
भी
है
हारी
दिल
एक
ही
छत
के
नीचे
रहते
हैं
वहशी
आँखें
मिरा
पुजारी
दिल
मेरी
तन्हाई
के
हैं
दो
साथी
इक
मैं
हूँ
एक
मेरा
भारी
दिल
ये
मुझे
ही
पता
है
के
कैसे
तेरे
बिन
ज़िन्दगी
गुज़ारी
दिल
इक
ज़माना
था
इश्क़
का,
जब
लोग
बात
पर
मरते
थे
तुम्हारी
दिल
तुझको
इक
दिन
बहुत
रुलाएगा
तेरा
ये
ज़ूद
ऐतबारी
दिल
खूब
करते
रहो
ख़ता
'कातिब'
ग़लतियां
गिन
रहा
है
सारी
दिल
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Ved prakash Pandey
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दस्त
हक़
में
मिरे
उठा
दो
बस
मुझको
पैसे
नहीं
दु'आ
दो
बस
उसकी
तस्वीर
को
बनाते
वक़्त
मुझको
तस्वीर
से
हटा
दो
बस
मूड
मेरा
बहुत
ख़राब
है
दोस्त
कोई
अच्छी
ग़ज़ल
सुना
दो
बस
मैं
किसी
और
का
न
हो
पाया
कोई
जाकर
उसे
बता
दो
बस
कल
जो
लड़की
मिली
थी
साड़ी
में
मुझको
उसका
कोई
पता
दो
बस
इश्क़
उकता
गया
है
दर्शन
से
तुम
बदन
का
मुझे
पता
दो
बस
आख़िरी
चीज़
भी
करो
'कातिब'
उठ
के
सूरज
को
अब
बुझा
दो
बस
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Ved prakash Pandey
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है
इश्क़
पर
पहरे
हमारे
इस
तरह
की
क्या
कहें
वो
पानी
पीने
के
बहाने
फ़ोन
करती
है
मुझे
Ved prakash Pandey
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गाने
नुसरत
के
हाए!
बारिश
में
उसपे
इक
प्याली
चाय
बारिश
में
भींगता
जिस्म
थरथराता
हुस्न
और
ख़ाली
सराय
बारिश
में
कितना
अच्छा
हो
साथ
हो
हम
तुम
और
हो
इक
प्याली
चाय
बारिश
में
झूम
उठ्ठे
फ़ज़ा
वो
लड़की
जब
प्रेम
धुन
गुनगुनाये
बारिश
में
काश
ऐसा
हो,
पास
आने
के
वो
भी
सोचे
उपाय
बारिश
में
गर
इजाजत
हो
तो
तिरे
लब
से
पी
लें
दो
घूंट
चाय
बारिश
में
यूँँ
तो
हर
शै
हसीं
है
पर
उसका
वो
बदन
आए
हाए
बारिश
में
उसकी
गिनती
मुनाफ़िक़ों
में
हो
जो
भी
ख़ुद
को
बचाये
बारिश
में
उसके
पायल
के
छंछनाहट
की
याद
"कातिब"
सताए
बारिश
में
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Ved prakash Pandey
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ये
चराग़ों
की
ही
जसारत
थी
वरना
बुझ
जाते
ऐसी
हालत
थी
मेरे
अंदर
जो
मर
गया
है
ना
उसको
तुम
सेे
बहुत
मुहब्बत
थी
आप
क्यूँ
हम
पे
मर
गए
जब
के
आपको
जीने
की
सहूलत
थी
कर
लिया
ऐतबार
जो
भी
मिला
दिल
लगाने
की
इतनी
उजलत
थी
आपसे
जिस्म
किसने
माँगा
था
हमको
बस
प्यार
की
जरुरत
थी
उसके
धोके
से
पहले
दिल
में
मेरे
प्यार
देने
की
इक
रिवायत
थी
उस
गली
से
गुज़रना
ही
यारों
दिल
की
सब
सेे
बड़ी
हिमाकत
थी
तुम
क्यूँ
रोते
हो
इश्क़
के
लिए
अब
तुमको
तो
जिस्म
की
जरुरत
थी
हो
गए
मूव
ऑन
सो
उन
सेे
दोस्ती
थी
न
अब
अदावत
थी
मुंतज़िर
सिर्फ़
तुम
नहीं
थे
कल
शहर
भर
में
हमारी
दावत
थी
इसलिए
रिश्ते
नाते
छूट
गए
हमको
सच
बोलने
की
आदत
थी
हमको
कमअक्ल
ही
रखा
तुमने
उम्र
तुम
सेे
यही
शिकायत
थी
बेवफाई
ने
जाँ
ले
ली
वरना
प्यार
करना
तो
उसकी
आदत
थी
मेरी
सुनता
न
था
कोई
"कातिब"
शहर
में
आज
ऐसी
वहशत
थी
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Ved prakash Pandey
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