dasht ko us ki rah bhatk | दश्त को उस की रह भटकाना ठीक नहीं

  - Uzma Naqvi
दश्तकोउसकीरहभटकानाठीकनहीं
वहशतकायूँँआनाजानाठीकनहीं
वोजोतेरीयादमेंधड़केऔरजिए
ऐसेदिलसेवापसआनाठीकनहीं
बार-ए-नशातसेउसदिलकोमरजानेदो
रोरोकरयूँँजीबहलानाठीकनहीं
वोतोआलम-ए-शौक़मेंहैमहबूबाके
दिलमरजाएतोदफ़नानाठीकनहीं
दर्दकोअपनीहिद्दतकारंगचढ़नेदो
इसघावकायूँँसहलानाठीकनहीं
  - Uzma Naqvi
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