wajh jeene ki tumhaara saath hai | वज्ह जीने की तुम्हारा साथ है

  - Uzma Iqbal
वज्हजीनेकीतुम्हारासाथहै
ज़िंदगीगोयातुम्हारेहाथहै
मेरीबदनामीमिरीतक़दीरथी
लोगकहतेहैंतुम्हाराहाथहै
जानतेहैंहमकितुमऐसेनहीं
तोड़देनाभरमजोसाथहै
मोहलेनेकायेफ़नजोतुझमेंहै
मेरीउल्फ़तकाभीइसमेंहाथहै
क्याकरेंहमबसमेंअपनेकुछनहीं
फिरभीजीनेकीतमन्नासाथहै
हसरतेंलाखोंसिमटकरगईं
एकमुट्ठीदिलजोअपनेसाथहै
शख़्सियतअपनीबिखरसकतीनहीं
दोस्तीकाऔरवफ़ाकासाथहै
सूरत-ए-‘उज़मा’जोबदलीसीलगी
गर्दिश-ए-दौर-ए-ज़माँकाहाथहै
  - Uzma Iqbal
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