gham bhulaane ka ha | ग़म भुलाने का हमें कोई बहाना तो मिले

  - Usha Shafaq
ग़मभुलानेकाहमेंकोईबहानातोमिले
शब-ए-फ़ुर्क़तकाहरइकलम्हासुहानातोमिले
मंदिर-ओ-मस्जिद-ओ-मा'बदहोकिमय-ख़ानाहो
सरझुकानेकेलिएकोईठिकानातोमिले
बज़्म-ए-ख़ामोशकीआहटहोकिपतझड़कासुकूँ
ऐश-ओ-ग़महमकोयहाँशाना-ब-शानातोमिले
येतसल्लीसहीयादआईतोवोभीआए
मेरेएहसास-ए-ग़म-ए-दिलकानिशानातोमिले
सिर्फ़तक़दीरमेंहोसहरा-नवर्दीजिसकी
मुझसादुनियामेंकोईऐसादीवानातोमिले
अपनेअश्कोंपेउठालेकोईइशरतकाबोझ
वक़्तकीराहमेंअबऐसाज़मानातोमिले
मश्क़-ए-यारान-ए-सितमसेहन-ए-गुलिस्ताँमेंहै
सुब्ह-दमजश्न-ए-बहाराँकाफ़सानातोमिले
शामियानाहोसितारोंकामिरेआँगनमें
मेरीक़िस्मतमें'शफ़क़'ऐसाघरानातोमिले
  - Usha Shafaq
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