kahii dua to kahii harf-e-iltijaa thehri | कहीं दु'आ तो कहीं हर्फ़-ए-इल्तिजा ठहरी

  - Usha Bhadoriya
कहींदु'आतोकहींहर्फ़-ए-इल्तिजाठहरी
मैंअपनेआपमेंडूबीतोबे-सदाठहरी
मैंजानतीहूँसलामतनहींकोईदामन
येरौशनीभीकहाँकिसकाआइनाठहरी
सफ़रथाशर्तमगरजबभीएकनामआया
क़दमतोचलतेरहेरूहजा-ब-जाठहरी
तूदरमियाँमेंमिलादरमियाँमेंछूटगया
जोइब्तिदाथीमिरीहद्द-ए-इंतिहाठहरी
हवाकाहाथपकड़करगुज़रगईख़ुशबू
मैंतेरीराहमेंठहरीअगरतोक्याठहरी
सभीहैंख़ुशमिरेचेहरेपेकुछख़राशेंहैं
कोईनिगाहकहाँदर्द-आश्नाठहरी
फिरउसकेबा'दघुटननेमुझेनिहालकिया
मिरेक़रीबज़रादेरकोहवाठहरी
सफ़रनसीबरहासिर्फ़तेरेनामकेसाथ
तिरीनज़रमेंमगरफिरभीबे-वफ़ाठहरी
क़रीबआनेकीकोशिशतोउसनेकी'ऊषा'
मैंउसकेहक़मेंमगरख़ुदहीफ़ासलाठहरी
  - Usha Bhadoriya
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