vafaa ki raah men gul hi nahin hai khaar bhi hai | वफ़ा की राह में गुल ही नहीं है ख़ार भी है

  - Urooj Qadri
वफ़ाकीराहमेंगुलहीनहींहैख़ारभीहै
येजुर्मवोहैकिपादाशउसकीदारभीहै
सँभलकेमिरेहमदमकिराह-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा
मक़ाम-ए-सज्दाभीमैदान-ए-कार-ज़ारभीहै
मिरेख़ुदातिरीरहमतकीआसरखताहै
तिरायेबंदाकिख़ातीभीशर्मसारभीहै
ख़िज़ाँकादौरहैघबराबुलबुल-ए-ग़मगीं
ख़िज़ाँकेबा'दहीफिरमौसम-ए-बहारभीहै
वोवक़्तदूरनहींहैकिफिरतूचहकेगा
किख़ारज़ारमेंपोशीदालाला-ज़ारभीहै
नशेमेंमस्तहैंजोलोगवोभीयेसुनलें
नशेकेबा'दहीआ'ज़ा-शिकनख़ुमारभीहै
येकारोबार-ए-मोहब्बतभीक्याबलाहै'उरूज'
यक़ींहैवा'दा-ख़िलाफ़ीकाइंतिज़ारभीहै
  - Urooj Qadri
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