saba se aati hai kuchh boo-e-aashna mujh ko | सबास आती है कुछ बू-ए-आश्ना मुझ को

  - Urfi Aafaqi
सबासआतीहैकुछबू-ए-आश्नामुझको
बुलारहाहैमिरेख़ूँकाज़ाइक़ामुझको
हनूज़सफ़्हा-ए-हस्तीपेहूँमैंहर्फ़-ए-ग़लत
कोईहनूज़हैलिखलिखकेकाटतामुझको
हज़ारचेहरातिलिस्म-ए-गुरेज़-पाहूँमैं
असीरकरसकाकोईआइनामुझको
चलाहीजाऊँमैंपरछाइयोंकेदेसकोऔर
पुकारतारहेकिरनोंकाक़ाफ़िलामुझको
यहीहैंरत-जगेजबसेखुलींमिरीआँखें
थावोख़्वाबमिराइकअज़ाबथामुझको
चलाथामैंतोसमुंदरकीतिश्नगीलेकर
मिलायेकैसासराबोंकासिलसिलामुझको
येबातकिससेकहूँआहइकगुल-ए-ख़ूबी
बड़ेहीप्यारसेकाँटाचुभोगयामुझको
  - Urfi Aafaqi
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