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Upendra Bajpai
uski aañkhen pasand thii so mujhe
uski aañkhen pasand thii so mujhe | उसकी आँखें पसंद थी सो मुझे
- Upendra Bajpai
उसकी
आँखें
पसंद
थी
सो
मुझे
उसने
आँसू
बना
के
रक्खा
है
- Upendra Bajpai
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अब
उदास
फिरते
हो
सर्दियों
की
शामों
में
इस
तरह
तो
होता
है
इस
तरह
के
कामों
में
Shoaib Bin Aziz
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लम्हे
उदास
उदास
फ़ज़ाएं
घुटी
घुटी
दुनिया
अगर
यही
है
तो
दुनिया
से
बच
के
चल
Shakeel Badayuni
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शाम
भी
थी
धुआँ
धुआँ
हुस्न
भी
था
उदास
उदास
दिल
को
कई
कहानियाँ
याद
सी
आ
के
रह
गईं
Firaq Gorakhpuri
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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सुखा
ली
सबने
ही
आँखें
हवा
ए
ज़िन्दगी
से
यहाँ
अब
भी
वही
रोना
रुलाना
चल
रहा
है
Farhat Ehsaas
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सीधा-साधा
डाकिया
जादू
करे
महान
एक
ही
थैले
में
भरे
आँसू
और
मुस्कान
Nida Fazli
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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निभाना
है
किसी
का
इश्क़
भी
और
किसी
की
बात
रखना
चाहती
है
मुझे
भी
छोड़ना
मुमकिन
नहीं
है
उसे
भी
साथ
रखना
चाहती
है
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Upendra Bajpai
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अब
तो
दोनों
के
मुक़द्दर
ही
आज़माने
हैं
है
बॉल
आख़िरी
और
सात
रन
बनाने
हैं
Upendra Bajpai
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दस
सिगरेट
में
एक
ग़ज़ल
हो
पाती
है
तुमपे
ग़ज़ल
कहूँगा,
पहले
दस
सिगरेट
Upendra Bajpai
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जिसको
रखा
है
मैंने
सर-आंखों
पे
उसने
मुझको
वेटिंग
लिस्ट
में
रखा
है
Upendra Bajpai
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मुक़द्दर
का
सहारा
मिल
गया
नजिसे
तुमने
पुकारा
मिल
गया
न
मेरी
टूटी
हुई
कश्ती
न
देखो
कहो,
तुमको
किनारा
मिल
गया
न
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Upendra Bajpai
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