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Upendra Bajpai
qatl ka shauq to nahin lekin
qatl ka shauq to nahin lekin | क़त्ल का शौक़ तो नहीं लेकिन
- Upendra Bajpai
क़त्ल
का
शौक़
तो
नहीं
लेकिन
एक
बच्चे
को
मारना
है
मुझे
- Upendra Bajpai
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रंग
की
अपनी
बात
है
वर्ना
आख़िरश
ख़ून
भी
तो
पानी
है
Jaun Elia
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रोज़
रोने
के
बहाने
ढूँढ़ते
है
बेबसी
से
अपने
रिश्ते
ख़ून
के
है
देख
लेंगे
फिर
ग़लत
क्या
है
सही
क्या
आ
अभी
इक
दूसरे
को
चूमते
है
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Aman Mishra 'Anant'
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ये
उसकी
मेहरबानी
है
वो
घर
में
ही
सँवरती
है
निकल
आए
जो
महफ़िल
में
तो
क़त्ल-ए-आम
हो
जाए
Ashraf Jahangeer
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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क़त्ल
से
पहले
वो
हर
शख़्स
के
दिल
की
हसरत
पूछ
लेता
था
मगर
पूरी
नहीं
करता
था
Vishnu virat
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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वो
अपने
ख़ून
से
लिखने
लगी
है
नाम
मेरा
अब
इस
मज़ाक़
को
संजीदगी
से
लेना
है
Shakeel Jamali
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आप
दस्ताने
पहनकर
छू
रहे
हैं
आग
को
आप
के
भी
ख़ून
का
रंग
हो
गया
है
साँवला
Dushyant Kumar
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मुहब्बत
में
बहाएा
ख़ून
औ
पानी
कहा
हमने
तेरी
हर
ख़ामियों
को
हँस
के
नादानी
कहा
हमने
Alankrat Srivastava
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इक
ज़रा
बात
पर
अपने
से
पराए
हुए
लोग
हाए
वो
ख़ून
पसीने
से
कमाए
हुए
लोग
Khan Janbaz
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गाँव
का
वो
लड़का
जो
सब
में
अव्वल
था
सिगरेट
पीते-पीते
इक
दिन
मर
जाएगा
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Upendra Bajpai
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चल
पड़ा
था
देखकर
मैं
मौत
का
रस्ता
खुला
ऐन
वक़्त-ए-ख़ुदकुशी
पंखे
से
पर
फंदा
खुला
और
फिर
इक
रोज़
उसने
लब
मेरे
लब
पे
रखे
और
फिर
इक
रोज़
मुझपे
मीर
का
मिसरा
खुला
मुझको
रोता
देखने
की
चाह
थी
उसकी
सो
अब
छोड़
देता
हूँ
मैं
अक्सर
रात
दरवाज़ा
खुला
और
फिर
इक
दिन
किसी
से
चैट
उसकी
देख
ली
और
फिर
इक
दिन
हमारी
अक्ल
का
ताला
खुला
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Upendra Bajpai
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तुम
तो
बेताब
थे
जगाने
को
पर
मुझे
नींद
ही
नहीं
आई
Upendra Bajpai
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रश्क़
होता
है
चूमते
हैं
गाल
तेरे
झुमके
रक़ीब
हैं
मेरे
Upendra Bajpai
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उसको
कोई
बताओ
यहाँ
ज़िन्दगी
भी
है
जो
शख़्स
ख़ुद-कुशी
की
तरफ़
जा
रहा
है
यार
Upendra Bajpai
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