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Upendra Bajpai
mere jaise lafange bhi meri jaañ
mere jaise lafange bhi meri jaañ | मेरे जैसे लफंगे भी मेरी जाँ
- Upendra Bajpai
मेरे
जैसे
लफंगे
भी
मेरी
जाँ
अदब
से
नाम
लेते
है
तुम्हारा
- Upendra Bajpai
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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उसने
महफ़िल
से
उठाया
हमको
जिसको
पलकों
पे
बिठाया
हमने
Vishal Bagh
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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तिरे
सिवा
भी
कहीं
थी
पनाह
भूल
गए
निकल
के
हम
तिरी
महफ़िल
से
राह
भूल
गए
Majrooh Sultanpuri
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समुंदर
में
भी
सहरा
देखना
है
मुझे
महफ़िल
में
तन्हा
देख
लेना
Aqib khan
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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मुझ
सेे
होकर
के
ही
बे-ज़ार
चले
जाते
हैं
मेरी
महफ़िल
से
मेरे
यार
चले
जाते
हैं
मुझको
मालूम
है
रहता
नहीं
है
अब
वो
वहाँँ
साल
में
फिर
भी
हम
इक
बार
चले
जाते
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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अदब
वाले
अदब
की
महफ़िलें
पहचान
लेते
हैं
उन्हें
तुम
प्यार
से
कुछ
भी
कहो
वो
मान
लेते
हैं
जहाँ
तक
देख
सकते
हैं
वहाँ
तक
सुन
नहीं
सकते
मगर
जब
इश्क़
हो
जाए
तो
धड़कन
जान
लेते
हैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
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न
जाने
कब
से
इक
मतला
लिए
बैठा
हूँ
महफ़िल
में
तुम्हारा
ज़िक्र
कर
दे
कोई
तो
पूरी
ग़ज़ल
कर
लूँ
Harsh saxena
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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मैं
आज
भी
उस
इश्क़
की
जागीर
में
ख़ुश
हूँ
यानी
मैं
गुज़रे
वक़्त
की
तस्वीर
में
ख़ुश
हूँ
डर
लग
रहा
था
तेरी
जुदाई
से
मुझको
पर
सपने
में
ख़ुश
नहीं
था
मैं
ता'बीर
में
ख़ुश
हूँ
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Upendra Bajpai
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मैं
आँखें
बंद
करके
देखता
हूँ
मैं
जब
मर
जाऊँगा
कैसा
लगूँगा
Upendra Bajpai
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मौत
के
बाद
का
मंज़र
न
बयाँ
हो
जैसे
ऐसे
मुश्किल
है
ज़माने
से
तेरा
दुख
कहना
Upendra Bajpai
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मुझको
तितली
बना
दे
या
मौला
एक
गुल
पे
है
बैठना
मौला
जल
चुका
हूँ
मैं
आख़िरी
कश
तक
मैं
हूँ
सिगरेट
मुझे
बुझा
मौला
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Upendra Bajpai
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मौत
जब
पास
में
खड़ी
होगी
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
करेंगे
आप
Upendra Bajpai
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