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Umesh Maurya
tumhaare KHvaab men ham kho gaye kuchh der ke khaatir
tumhaare KHvaab men ham kho gaye kuchh der ke khaatir | तुम्हारे ख़्वाब में हम खो गए कुछ देर के ख़ातिर
- Umesh Maurya
तुम्हारे
ख़्वाब
में
हम
खो
गए
कुछ
देर
के
ख़ातिर
हमारे
साथ
में
तुम
हो
गए
कुछ
देर
की
ख़ातिर
- Umesh Maurya
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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किसी
ने
ख़्वाब
में
आकर
मुझे
ये
हुक्म
दिया
तुम
अपने
अश्क
भी
भेजा
करो
दु'आओं
के
साथ
Afzal Khan
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फिरता
है
कैसे-कैसे
सवालों
के
साथ
वो
उस
आदमी
की
जामातलाशी
तो
लीजिए
Dushyant Kumar
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क्यूँँ
चलते
चलते
रुक
गए
वीरान
रास्तो
तन्हा
हूँ
आज
मैं
ज़रा
घर
तक
तो
साथ
दो
Adil Mansuri
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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बे-सबब
मुस्कुरा
रहा
है
चाँद
कोई
साज़िश
छुपा
रहा
है
चाँद
Gulzar
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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ज़ंजीरें
तो
पीढ़ी
दर
पीढ़ी
चलती
है
इन्सानों
की
ही
अदला
बदली
होती
है
Umesh Maurya
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ठहर
जाती
हैं
क्यूँ
नज़रें
वहाँ
पर
जहाँ
बैठी
थी
तुम
जुल्फ़ें
सुखाकर
Umesh Maurya
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बुझाती
हो
चराग़ों
को
उसी
आँचल
के
पल्लू
से
उसी
आँचल
के
पल्लू
से
बचाती
थी
कभी
उसको
Umesh Maurya
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किसको
सुनाते
इश्क़
की
इस
दास्तान
को
धरती
तरस
रही
थी
यहाँ
आसमान
को
Umesh Maurya
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माँगा
गया
सबूत
तो
सच
हार
ही
गया
इस
बार
फिर
से
झूठ
बाज़ी
मार
ही
गया
Umesh Maurya
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