sab intazaar men the kab koi zabaan khule | सब इंतजार में थे कब कोई ज़बान खुले

  - Umair Najmi
सबइंतजारमेंथेकबकोईज़बानखुले
फिरउसकेहोंठखुलेऔरसबकेकानखुले
होचाहेंजितनाहसींख़्वाबयादरहतानहीं
जबआँखदर्जनोंलोगोंकेदरमियानखुले
बहुतसालेंगेकिरायाजरासीदेंगेजगह
यहाँकेलोगोंकेदिलतंगहैमकानखुले
गयावोशख़्सतोनजरेंउठाईलोगोंने
हवाचलीतोजहाजोंकेबाजबानखुले
येकिसनेमेज़पेछोड़ीहैहोंठोंकीतस्वीर
येकिसनेरखेहैंचीनीकेमर्तबानखुले
  - Umair Najmi
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