bachpan men jab main shaam ko | बचपन में जब मैं शाम को

  - Uday Bansal
बचपनमेंजबमैंशामको
गाड़ीकीखिड़कीसे
झाँककरदेखता
तोमुस्कुरातेदूधियासफ़ेदचाँदको
अपनेबग़लमेंपाता
मानोमुझसेदौड़लगारहाहै
कोईभीसड़ककोईभीमोड़
किसीभीसम्तकिसीभीओर
मैंजहाँभीजाऊँमुझसेक़दमसेक़दममिलारहाहै
परजानेक्यूँ
येमुझसेजीतनेकेलिएनहींदौड़ताकि
मैंजबरुकूँयेरुकताहै
मैंजबचलूँयाचलताहै
गाड़ीरफ़्तारपकड़ेचाँदभीरफ़्तारपकड़ताहै
गाड़ीरेडलाइटपररुकेचाँदभीरुकताहै
अबबड़ाहोरहाहूँतो
ज़िंदगीसेदौड़लगारहाहूँ
ज़िंदगीसंग-दिलहै
मैंआगेरहूँयापीछेज़िंदगीनहींरुकतीहै
मुझेज़िंदगीसेदौड़नहींलगानी
चाँदनिकलआयाहैतोगाड़ीभीनिकालो
मुझेचाँदसेदौड़लगानीहै
  - Uday Bansal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy