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Saahir Ubaid Aleemi
hamne bas ik hunar hi paaya hai
hamne bas ik hunar hi paaya hai | हमने बस इक हुनर ही पाया है
- Saahir Ubaid Aleemi
हमने
बस
इक
हुनर
ही
पाया
है
आँधियों
में
दिया
जलाया
है
- Saahir Ubaid Aleemi
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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उसने
गले
से
हमको
लगाया
तो
रो
पड़े
अपना
बना
के
हाथ
छुड़ाया
तो
रो
पड़े
मैंने
ग़मों
से
कह
तो
दिया
रहना
उम्र
भर
वा'दा
ग़मों
ने
अपना
निभाया
तो
रो
पड़े
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Vikas Sahaj
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खो
दिया
तुम
को
तो
हम
पूछते
फिरते
हैं
यही
जिस
की
तक़दीर
बिगड़
जाए
वो
करता
क्या
है
Firaq Gorakhpuri
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गुज़रने
ही
न
दी
वो
रात
मैं
ने
घड़ी
पर
रख
दिया
था
हाथ
मैं
ने
Shahzad Ahmad
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बीस
बरस
से
इक
तारे
पर
मन
की
जोत
जगाता
हूँ
दीवाली
की
रात
को
तू
भी
कोई
दिया
जलाया
कर
Majid Ul Baqri
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मक़तल-ए-शौक़
के
आदाब
निराले
हैं
बहुत
दिल
भी
क़ातिल
को
दिया
करते
हैं
सर
से
पहले
Ali Sardar Jafri
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यार
उसके
क़ीमती
तोहफ़े
तो
लाए
थे
बहुत
मैं
बरेली
का
था
मैंने
ला
के
झुमका
दे
दिया
Rudransh Trigunayat
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तेरी
हर
बात
मोहब्बत
में
गवारा
कर
के
दिल
के
बाज़ार
में
बैठे
हैं
ख़सारा
कर
के
आसमानों
की
तरफ़
फेंक
दिया
है
मैं
ने
चंद
मिट्टी
के
चराग़ों
को
सितारा
कर
के
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Rahat Indori
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तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
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ये
शुक्र
है
कि
मिरे
पास
तेरा
ग़म
तो
रहा
वगर्ना
ज़िंदगी
भर
को
रुला
दिया
होता
Gulzar
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बे
रंग
बे
अदा
है
हर
ज़िंदगी
खता
है
लेकिन
है
ये
करामत
सब
कुछ
हमें
पता
है
Saahir Ubaid Aleemi
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फैला
रही
है
नफ़रत
इस
दौर
की
हुकूमत
बच
कर
किधर
चलें
हम
किस
ओर
यार
बैठें
Saahir Ubaid Aleemi
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कैसे
बद-बख़्त
हैं
ज़माने
में
फ़र्ज़
छोड़ा
किए
कमाने
में
Saahir Ubaid Aleemi
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रात
भर
घूमते
रहे
बादल
चाँद
को
चूमते
रहे
बादल
Saahir Ubaid Aleemi
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कर
के
क़ुर्बान
अपनी
ख़ुशियों
को
ग़म
के
साए
में
यार
जीता
हूँ
मय-कदा
तो
नहीं
मगर
फिर
भी
तेरी
आँखों
का
जाम
पीता
हूँ
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Saahir Ubaid Aleemi
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