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Umrez Ali Haider
banata hooñ sehra ko bastii
banata hooñ sehra ko bastii | बनाता हूँ सहरा को बस्ती
- Umrez Ali Haider
बनाता
हूँ
सहरा
को
बस्ती
सिवा
जो
है
वहमो-गुमाँ
अब
- Umrez Ali Haider
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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पानी
आँख
में
भरकर
लाया
जा
सकता
है
अब
भी
जलता
शहर
बचाया
जा
सकता
है
Abbas Tabish
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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इस
दौर-ए-सियासत
का
इतना
सा
फ़साना
है
बस्ती
भी
जलानी
है
मातम
भी
मनाना
है
Unknown
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न
जाने
कैसी
महक
आ
रही
है
बस्ती
से
वही
जो
दूध
उबलने
के
बाद
आती
है
Munawwar Rana
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सुख़न-फ़हमों
की
बस्ती
में
सुख़न
की
ज़िन्दगी
कम
है
जहाँ
शाइर
ज़ियादा
हैं
वहाँ
पर
शा'इरी
कम
है
मैं
जुगनू
हूँ
उजाले
में
भला
क्या
अहमियत
मेरी
वहाँ
ले
जाइए
मुझको
जहाँ
पर
रौशनी
कम
है
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Balmohan Pandey
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कोई
हाथ
भी
न
मिलाएगा
जो
गले
मिलोगे
तपाक
से
ये
नए
मिज़ाज
का
शहर
है
ज़रा
फ़ासले
से
मिला
करो
Bashir Badr
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एक
से
एक
जुनूँ
का
मारा
इस
बस्ती
में
रहता
है
एक
हमीं
हुशियार
थे
यारो
एक
हमीं
बद-नाम
हुए
Ibn E Insha
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यूँँ
ही
नहीं
बस्ती
जली,
यूँँ
ही
नहीं
सब
लड़
मरे
कुछ
लोग
आए
बाहरी,
फिर
मज़हबी
दंगा
हुआ
Ankit Raj
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हर
तरफ़
है
बे-सर-ओ-सामानी
तख़्त-ओ-ताज
अब
तो
उछाले
जाएँ
Umrez Ali Haider
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वो
बस्ती
न
सहरा
यहाँ
अब
दिलो-जाँ
हुए
हैं
फ़ुलाँ
अब
Umrez Ali Haider
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रोज़-ओ-शब
के
हैं
मशग़ले
'हैदर'
सुब्ह
था
में
कि
शाम
अपने
को
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Umrez Ali Haider
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ये
सूरत
को
देखा
जो
करते
हो
इतनी
कभी
दिल
भी
देखा
करो
तुम
सितम-गर
Umrez Ali Haider
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शबे-हिज्र
तेरी
है
क्या
शर्त
अब
जो
मेरी
जाँ
है
अटकी
फ़ुग़ाँ
बे-असर
है
ये
आँधी
है
लाई
उसी
ने
कि
'हैदर'
मेरा
पेट
ख़ाली
भरा
उसका
घर
है
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Umrez Ali Haider
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