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Purushottam Tripathi
har ik sukhe suboo ko bhar raha hai
har ik sukhe suboo ko bhar raha hai | हर इक सूखे सुबू को भर रहा है
- Purushottam Tripathi
हर
इक
सूखे
सुबू
को
भर
रहा
है
वो
सबके
ख़्वाब
पूरे
कर
रहा
है
मैं
हर
इक
दिन
बड़ा
तो
हो
रहा
हूँ
मेरे
अंदर
का
बच्चा
मर
रहा
है
- Purushottam Tripathi
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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रो
रही
हूँ
कि
तुम
दिख
न
पाए
कहीं
हाए
ये
ख़्वाब
सिंदूर
है
माँग
में
Neeraj Neer
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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ये
ज़रूरी
है
कि
आँखों
का
भरम
क़ाएम
रहे
नींद
रक्खो
या
न
रक्खो
ख़्वाब
मेयारी
रखो
Rahat Indori
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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तलब
करें
तो
ये
आँखें
भी
इन
को
दे
दूँ
मैं
मगर
ये
लोग
इन
आँखों
के
ख़्वाब
माँगते
हैं
Abbas rizvi
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सुनहरी
लड़कियों
इनको
मिलो
मिलो
न
मिलो
ग़रीब
होते
हैं
बस
ख़्वाब
देखने
के
लिए
Abbas Tabish
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मत
बताना
कि
बिखर
जाएँ
तो
क्या
होता
है
नईं
नस्लों
को
नए
ख़्वाब
सजाने
देना
Ameer Imam
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हमको
हमारी
नींद
भी
वापस
नहीं
मिली
लोगों
को
उनके
ख़्वाब
जगा
कर
दिए
गए
Imran Aami
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ये
आरज़ू
भी
बड़ी
चीज़
है
मगर
हमदम
विसाल-ए-यार
फ़क़त
आरज़ू
की
बात
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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हमारा
दुख
नहीं
है
ये
ज़माने
भर
का
दुख
है
सभी
को
अपने
दुख
को
बस
छुपाने
भर
का
दुख
है
ये
दिल-विल
टूटना
मिलना
बिछड़ना
दुख
है
कोई
अमा
ये
दुख
तो
केवल
गुनगुनाने
भर
का
दुख
है
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Purushottam Tripathi
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हमको
तो
कोई
तिनका
सा
छूकर
डुबो
गया
मौजों
की
भूल
कुछ
न
थी
सागर
डुबो
गया
क्यूँँ
दोष
दे
रहे
हैं
सभी
गर्क़-ए-आब
को
मुझको
तो
यार
मेरा
मुक़द्दर
डुबो
गया
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Purushottam Tripathi
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तुम्हारा
दिल
नहीं
लगता
कहीं
भी
किसी
से
दिल
लगा
बैठे
हो
पगले
Purushottam Tripathi
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फिर
वही
ज़िंदगी
शुरू
कर
दी
हमने
भी
शा'इरी
शुरू
कर
दी
इश्क़
के
साथ
घर
चलाना
था
इसलिए
नौकरी
शुरू
कर
दी
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Purushottam Tripathi
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कहीं
पर
कोई
है
जो
ख़ुद
की
परछाई
से
डरता
है
कोई
महफ़िल
तो
कोई
है
जो
तन्हाई
से
डरता
है
यहाँ
हर
शख़्स
कहता
है
ये
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
मेरे
अंदर
जो
लड़का
है
वो
रा'नाई
से
डरता
है
वही
इक
रोज़
इक
लड़की
की
बिछड़न
देख
ली
जबसे
उसी
दिन
से
ये
मेरा
दिल
भी
शहनाई
से
डरता
है
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Purushottam Tripathi
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