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Purushottam Tripathi
dekho ik bacche ne phir dam tod diya
dekho ik bacche ne phir dam tod diya | देखो इक बच्चे ने फिर दम तोड़ दिया
- Purushottam Tripathi
देखो
इक
बच्चे
ने
फिर
दम
तोड़
दिया
ख़्वाबों
की
बस्ती
में
अक्सर
होता
है
- Purushottam Tripathi
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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अनोखी
वज़्अ
है
सारे
ज़माने
से
निराले
हैं
ये
'आशिक़
कौन
सी
बस्ती
के
या-रब
रहने
वाले
हैं
Allama Iqbal
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उसी
का
शहर
वही
मुद्दई
वही
मुंसिफ़
हमें
यक़ीं
था
हमारा
क़ुसूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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दिल
की
बस्ती
पुरानी
दिल्ली
है
जो
भी
गुज़रा
है
उसने
लूटा
है
Bashir Badr
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बदन
लिए
तलाशता
फिरू
हूँ
रात
दिन
उसे
सुना
है
जान
भी
मेरी
कहीं
इसी
शहर
में
है
Bhaskar Shukla
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तेरी
आवाज़
को
इस
शहर
की
लहरें
तरसती
हैं
ग़लत
नंबर
मिलाता
हूँ
तो
पहरों
बात
होती
है
Ghulam Mohammad Qasir
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ये
शहर
वो
है
कि
कोई
ख़ुशी
तो
क्या
देता
किसी
ने
दिल
भी
दुखाया
नहीं
बहुत
दिन
से
Farhat Ehsaas
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इतनी
शोहरत
तो
मेरी
आज
भी
इस
शहर
में
है
एक
पत्ता
न
हिले
मेरी
इजाज़त
के
बग़ैर
Mukesh Jha
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रोज़
बस्ते
हैं
कई
शहर
नए
रोज़
धरती
में
समा
जाते
हैं
Kaifi Azmi
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हमको
तो
कोई
तिनका
सा
छूकर
डुबो
गया
मौजों
की
भूल
कुछ
न
थी
सागर
डुबो
गया
क्यूँँ
दोष
दे
रहे
हैं
सभी
गर्क़-ए-आब
को
मुझको
तो
यार
मेरा
मुक़द्दर
डुबो
गया
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Purushottam Tripathi
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तेरी
आँखों
का
वो
नीला
समुंदर
याद
आता
है
बिछड़ते
वक़्त
का
वो
एक
मंज़र
याद
आता
है
तू
मुझको
हर
समय
कुछ
इस
तरह
से
याद
आती
है
कि
जैसे
जेठ
में
सबको
दिसम्बर
याद
आता
है
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Purushottam Tripathi
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हर
इक
सूखे
सुबू
को
भर
रहा
है
वो
सबके
ख़्वाब
पूरे
कर
रहा
है
मैं
हर
इक
दिन
बड़ा
तो
हो
रहा
हूँ
मेरे
अंदर
का
बच्चा
मर
रहा
है
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Purushottam Tripathi
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कहीं
पर
कोई
है
जो
ख़ुद
की
परछाई
से
डरता
है
कोई
महफ़िल
तो
कोई
है
जो
तन्हाई
से
डरता
है
यहाँ
हर
शख़्स
कहता
है
ये
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
मेरे
अंदर
जो
लड़का
है
वो
रा'नाई
से
डरता
है
वही
इक
रोज़
इक
लड़की
की
बिछड़न
देख
ली
जबसे
उसी
दिन
से
ये
मेरा
दिल
भी
शहनाई
से
डरता
है
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Purushottam Tripathi
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कभी
तो
चाहिए
इस
जिस्म-ए-ज़िंदाँ
से
रिहाई
भी
कभी
तो
चाहिए
अपनों
से
दिल
को
आशनाई
भी
मेरी
मंज़िल
तेरी
ज़ुल्फ़ों
के
पेच-ओ-ख़म
से
आगे
है
मेरे
ज़िम्में
है
घर
वालों
की
रोटी
भी
दवाई
भी
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Purushottam Tripathi
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