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Trinetra Dubey
tum namak la laga kabhi to do
tum namak la laga kabhi to do | तुम नमक ला लगा कभी तो दो
- Trinetra Dubey
तुम
नमक
ला
लगा
कभी
तो
दो
हम
तो
मरहम
से
चोट
खाए
हैं
- Trinetra Dubey
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सुख़न
का
जोश
कम
होता
नहीं
है
वगरना
क्या
सितम
होता
नहीं
है
भले
तुम
काट
दो
बाज़ू
हमारे
क़लम
का
सर
क़लम
होता
नहीं
है
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Baghi Vikas
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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शाख़-दर-शाख़
होती
है
ज़ख़्मी
जब
परिंदा
शिकार
होता
है
Indira Varma
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बिछड़े
तो
रख
रखाव
भी
करना
नहीं
पड़ा
ताज़ा
किसी
को
घाव
भी
करना
नहीं
पड़ा
बस
देख
कर
ही
उसको
परिंदे
उतर
गए
उसको
तो
आओ
आओ
भी
करना
नहीं
पड़ा
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Azbar Safeer
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हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
Ada Jafarey
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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मिला
है
दुख
सदा
मुझको
मेरा
दुख
से
ये
नाता
है
मिरे
ख़ुद
घाव
में
मरहम
लगा
कर
दुख
सुलाता
है
Tiwari Jitendra
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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बेचकर
पेट
दिल
के
निवाले
हुए
यानी
बाज़ार
से
हम
निकाले
हुए
रंग
काला
जुदा
लोग
हैं
और
हम
दिल
को
बाज़ार
में
हैं
उछाले
हुए
हम
तड़पते
रहे
रौशनी
के
लिए
नेत्र
मेरे
जो
फूटे
उजाले
हुए
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Trinetra Dubey
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आइने
ने
कहा
देख
तू
है
यहाँ
और
फिर
एकदम
से
मुकर
हम
गए
Trinetra Dubey
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निकल
ही
रही
ईंट
घर
से
मिरे
अब
जहाँ
बन
रहा
है
महल
कुछ
दिनों
से
Trinetra Dubey
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बे-वजह
यार
तुम
से
अगर
मौन
हैं
प्यार
तो
है
ज़ियादा
मगर
मौन
हैं
Trinetra Dubey
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आ
रहा
है
नज़र
रंग
काला
घर
जला
रौशनी
कर
रहे
क्या
Trinetra Dubey
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