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Trinetra Dubey
nazar bhar nazar ek jab se nihaare
nazar bhar nazar ek jab se nihaare | नज़र भर नज़र एक जब से निहारे
- Trinetra Dubey
नज़र
भर
नज़र
एक
जब
से
निहारे
दिलों
में
रहे
दिल
मचल
कुछ
दिनों
से
- Trinetra Dubey
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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अलग
बैठे
थे
फिर
भी
आँख
साक़ी
की
पड़ी
हम
पर
अगर
है
तिश्नगी
कामिल
तो
पैमाने
भी
आएँगे
Majrooh Sultanpuri
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वो
मेरी
पीठ
में
ख़ंजर
ज़रूर
उतारेगा
मगर
निगाह
मिलेगी
तो
कैसे
मारेगा
Waseem Barelvi
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जब
भी
माँगूँ
तेरी
ख़ुशी
माँगूँ
और
दुआएँ
ख़ुदा
तलक
जाएँ
ख़्वाब
आएँ
तो
नींद
यूँँ
महके
आँख
से
ख़ुशबुएँ
छलक
जाएँ
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Ritesh Rajwada
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लाई
न
ऐसों-वैसों
को
ख़ातिर
में
आज
तक
ऊँची
है
किस
क़दर
तिरी
नीची
निगाह
भी
Firaq Gorakhpuri
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मैं
नज़र
से
पी
रहा
था
तो
ये
दिल
ने
बद-दुआ
दी
तिरा
हाथ
ज़िंदगी
भर
कभी
जाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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सलीक़ा
तो
नहीं
मालूम
हम
को
दीद
का
लेकिन
झुकाती
है
नज़र
को
जब
नज़र
भर
देखते
हैं
हम
Sandeep dabral 'sendy'
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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तुम्हें
देखे
ज़माना
हो
गया
है
नज़र
महके
ज़माना
हो
गया
है
बिछड़के
तुम
सेे
आँखें
बुझ
गई
हैं
ये
दिल
धड़के
ज़माना
हो
गया
है
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Subhan Asad
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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बेचकर
पेट
दिल
के
निवाले
हुए
यानी
बाज़ार
से
हम
निकाले
हुए
रंग
काला
जुदा
लोग
हैं
और
हम
दिल
को
बाज़ार
में
हैं
उछाले
हुए
हम
तड़पते
रहे
रौशनी
के
लिए
नेत्र
मेरे
जो
फूटे
उजाले
हुए
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Trinetra Dubey
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इतना
तन्हा
हूँ
मैं
कि
क्या
बताऊँ
बस
डर
लगता
है
मुझको
माँ
के
आँचल
में
Trinetra Dubey
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हम
दिलों
में
उतर
ही
गए
आप
के
शोर
है
ही
मगर
आज
मन
मौन
है
Trinetra Dubey
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जब
मन
भर
जाता
है
फ़नकारों
से
तब
ख़ंजर
लग
जाता
है
यारों
से
कच्ची
बख़री
की
चाहत
है
हम
भी
डर
लगता
है
हमको
दीवारों
से
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Trinetra Dubey
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छोड़
जाओ
मुझे
आइना
देख
लो
ख़ूब-सूरत
नहीं
एक
ग़द्दार
हो
Trinetra Dubey
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