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Sourabh Ratnawat
ham ne jungle kaat dale
ham ne jungle kaat dale | हम ने जंगल काट डाले
- Sourabh Ratnawat
हम
ने
जंगल
काट
डाले
बद-नुमा
मंज़र
बनाया
- Sourabh Ratnawat
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इश्क़
का
ज़ौक़-ए-नज़ारा
मुफ़्त
में
बदनाम
है
हुस्न
ख़ुद
बे-ताब
है
जल्वा
दिखाने
के
लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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पस-मंज़र
में
'फ़ीड'
हुए
जाते
हैं
इंसानी
किरदार
फ़ोकस
में
रफ़्ता
रफ़्ता
शैतान
उभरता
आता
है
Abdul Ahad Saaz
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काश
ऐसा
कोई
मंज़र
होता
मेरे
काँधे
पे
तेरा
सर
होता
Tahir Faraz
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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रोज़
बस्ते
हैं
कई
शहर
नए
रोज़
धरती
में
समा
जाते
हैं
Kaifi Azmi
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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जिस
शाने
पर
सर
रखते
हो
उस
शाने
पर
सो
जाते
हो
जाने
कैसे
दीदावर
हो
हर
मंज़र
में
खो
जाते
हो
Poonam Yadav
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एक
दफ़ा
बस
वापस
मंज़र
ऐसा
हो
हाथ
मेरा
सीधा
और
उल्टा
तेरा
हो
Tanoj Dadhich
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जैसा
मूड
हो
वैसा
मंज़र
होता
है
मौसम
तो
इंसान
के
अंदर
होता
है
Aziz Ejaaz
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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दौड़
में
जो
था
अकेला
मात
ख़ुदस
खा
गया
वो
Sourabh Ratnawat
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पहले
हम
को
घर
बनाया
फिर
हमें
खंडर
बनाया
Sourabh Ratnawat
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दुश्मनों
से
मिल
के
उसने
इक
नया
लश्कर
बनाया
हार
जब
दुश्मन
गया
तो
सुल्ह
का
अवसर
बनाया
Sourabh Ratnawat
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हम
को
मिट्टी
में
मिला
कर
ख़ुद
को
कूज़ा-गर
बनाया
Sourabh Ratnawat
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आसमाँ
में
टूटते
तारे
तो
देखे
हैं
कई
आज
इक
तारा
ज़मीं
पर
देखा
हम
ने
टूटते
Sourabh Ratnawat
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