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Salma Malik
har roz boodhe ho rahen hain waalidain
har roz boodhe ho rahen hain waalidain | हर रोज़ बूढ़े हो रहें हैं वालिदैन
- Salma Malik
हर
रोज़
बूढ़े
हो
रहें
हैं
वालिदैन
क्या
ग़म
नहीं
ये
भी
सताता
है
तुम्हें
- Salma Malik
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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इक
रोज़
इक
नदी
के
किनारे
मिलेंगे
हम
इक
दूसरे
से
अपना
पता
पूछते
हुए
Shahbaz Rizvi
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'फ़ैज़'
थी
राह
सर-ब-सर
मंज़िल
हम
जहाँ
पहुँचे
कामयाब
आए
Faiz Ahmad Faiz
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किनारे
दो
मिलाने
में
हैं
कितनी
मुश्किलें
सोचो
ये
पुल
दिन
भर
ही
सीने
पे
बिचारा
चोट
खाता
है
Prashant Beybaar
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बाग़बाँ
हम
तो
इस
ख़याल
के
हैं
देख
लो
फूल
फूल
तोड़ो
मत
Jaun Elia
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बातें
करो
तो
बोलती
है
बोलते
हो
तुम
बहुत
उसने
किनारे
पे
से
लहरें
देखी
गहराई
नहीं
100rav
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गुज़रता
ही
नहीं
वो
एक
लम्हा
इधर
मैं
हूँ
कि
बीता
जा
रहा
हूँ
Madan Mohan Danish
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तकल्लुफ़
छोड़कर
आओ
उसे
फिर
से
जिया
जाए
हमारा
बचपना
जो
एल्बमों
में
क़ैद
रहता
है
Shiva awasthi
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खड़ा
हूँ
आज
भी
रोटी
के
चार
हर्फ़
लिए
सवाल
ये
है
किताबों
ने
क्या
दिया
मुझ
को
Nazeer Baaqri
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जब
तक
जला
ये
हम
भी
जले
इसके
साथ
साथ
जब
बुझ
गया
चराग़
तो
सोना
पड़े
हमें
Abbas Qamar
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ये
दुनिया
आनी
जानी
है
इस
शय
की
सीरत
फ़ानी
है
भूखे
को
ख़्वाहिश
रोटी
की
हर
प्यासे
की
बस
पानी
है
जो
माँगो
वो
दे
देता
है
वो
रब
भी
कितना
दानी
है
कैसे
बीतेगा
हर
लम्हा
हर
पल
इक
खींचा-तानी
है
ओ
दरिया
तेरी
गहराई
बिन
डूबे
किसने
जानी
है
कुछ
कर
ही
जाएँगे
'सलमा'
अब
ठानी
है
तो
ठानी
है
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Salma Malik
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तू
मेरी
तक़दीर
न
बन
ख़्वाबों
की
ता'बीर
न
बन
हार
गले
का
बन
जा
तू
पा
की
तू
ज़ंजीर
न
बन
कर
देती
है
जो
हिस्से
ऐसी
तू
शमशीर
न
बन
जो
चुभता
है
सीने
में
ऐसा
कोई
तीर
न
बन
मिट
जाए
आसानी
से
ऐसी
तू
तहरीर
न
बन
रोना
आए
रोया
कर
हँसती
सी
तस्वीर
न
बन
ले
डूबेगी
'सलमा'
ये
हर
पल
तू
दिलगीर
न
बन
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Salma Malik
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हसरतें
इस
क़दर
भी
न
पाला
करो
दिल
मचलने
लगे
तो
सँभाला
करो
ये
सभी
के
लिए
क़ीमती
है
बहुत
यूँँ
किसी
की
न
इज़्ज़त
उछाला
करो
तीरगी
यूँँ
नहीं
ये
मिटेंगी
कभी
इन
चराग़ों
तले
भी
उजाला
करो
शोहरतें
भी
दिलाए
ग़ज़ल
शायरों
क़ाफ़िए
को
ज़रा
तुम
निराला
करो
ये
घुटन
मार
देगी
यूँँ
'सलमा'
तुम्हें
इस
सुख़न
में
दुखन
को
निकाला
करो
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Salma Malik
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लोग
ज़बानी
याद
भी
हो
जाते
हैं
दिल
लेकिन
बर्बाद
भी
हो
जाते
हैं
इन
मुश्किल
हालात
से
लड़ते
लड़ते
बच्चे
ये
फ़ौलाद
भी
हो
जाते
हैं
सुनते
आए
थे
जो
इश्क़
से
पहले
वो
क़िस्से
रूदाद
भी
हो
जाते
हैं
जिनको
तुम
हाकिम
कहते
फिरते
हो
लोग
वही
शद्दाद
भी
हो
जाते
हैं
बिन
माँगे
भी
मिल
जाते
हैं
लेकिन
लोग
यही
फ़रियाद
भी
हो
जाते
हैं
ये
मालूम
नहीं
है
शायद
तुमको
इश्क़
में
दिल
नाशाद
भी
हो
जाते
हैं
कहना
है
'सलमा'
को
बस
इतना
ही
शिकार
ख़ुद
सय्याद
भी
हो
जाते
हैं
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Salma Malik
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हर
चोट
खाया
शा'इरी
तो
करता
है
हर
चोट
खाया
तो
मगर
शायर
नहीं
Salma Malik
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