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Salma Malik
ham ko dil-e-fayyaaz hona chahiye
ham ko dil-e-fayyaaz hona chahiye | हम को दिल-ए-फ़य्याज़ होना चाहिए
- Salma Malik
हम
को
दिल-ए-फ़य्याज़
होना
चाहिए
तुमको
तो
हम
पे
नाज़
होना
चाहिए
चेहरे
पढ़े
जाते
नहीं
इस
दौर
में
सो
दर्द
को
अल्फ़ाज़
होना
चाहिए
हम
कब
तलक
तन्हा
रहें
यूँँ
बोलते
कोई
तो
हम-आवाज़
होना
चाहिए
इन
कोशिशों
का
हो
भले
अंजाम
जो
है
लाज़मी
आग़ाज़
होना
चाहिए
दुनिया
नज़रअंदाज़
करती
हो
करे
ख़ुद
को
क़दरअंदाज़
होना
चाहिए
की
हैं
ख़ताएँ
आपने
भी
इस
क़दर
अब
तो
हमें
नाराज़
होना
चाहिए
हो
इक
मिरा
भी
राज़
'सलमा'
और
फिर
तुमको
मिरा
हम-राज़
होना
चाहिए
- Salma Malik
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अलग
अंदाज़
हैं
दोनों
के
अपनी
बात
कहने
के
मैं
उसपे
शे'र
कहता
हूँ,
वो
ताना
मार
देती
है
Ankit Maurya
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है
दु'आ
याद
मगर
हर्फ़-ए-दुआ
याद
नहीं
मेरे
नग़्मात
को
अंदाज़-ए-नवा
याद
नहीं
Saghar Siddiqui
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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अजब
अंदाज़
से
ये
घर
गिरा
है
मिरा
मलबा
मिरे
ऊपर
गिरा
है
Aanis Moin
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हैं
और
भी
दुनिया
में
सुख़न-वर
बहुत
अच्छे
कहते
हैं
कि
'ग़ालिब'
का
है
अंदाज़-ए-बयाँ
और
Mirza Ghalib
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धौल-धप्पा
उस
सरापा
नाज़
का
शेवा
नहीं
हम
ही
कर
बैठे
थे
‘ग़ालिब’
पेश-दस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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दुनिया
भर
की
राम-कहानी
किस
किस
ढंग
से
कह
डाली
अपनी
कहने
जब
बैठे
तो
एक
एक
लफ़्ज़
पिघलता
था
Khalilur Rahman Azmi
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हरीम-ए-नाज़
के
पर्दे
में
जो
निहाँ
था
कभी
उसी
ने
शोख़
अदाएँ
दिखा
के
लूट
लिया
Anwar Taban
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नाज़
क्या
इस
पे
जो
बदला
है
ज़माने
ने
तुम्हें
मर्द
हैं
वो
जो
ज़माने
को
बदल
देते
हैं
Akbar Allahabadi
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मैं
जिसे
प्यार
का
अंदाज़
समझ
बैठा
हूँ
वो
तबस्सुम
वो
तकल्लुम
तिरी
आदत
ही
न
हो
Sahir Ludhianvi
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इक
क़लम
सी
है
किरदार
'सलमा'
बस
किताबत
महज़
काम
उसका
Salma Malik
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जिसके
बिना
तेरी
कहानी
ना-मुकम्मल
है
मिरी
जानाँ
तेरी
कहानी
का
ज़रूरी
बस
वही
किरदार
हूँ
मैं
तो
Salma Malik
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सूद
क्या
तुम
अदा
कर
नहीं
सकते
हो
अस्ल
भी
सिर
तुम्हारे
हैं
इतने
अभी
क़र्ज़
माँ-बाप
के
Salma Malik
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हर
आदमी
को
आदमी
दरकार
है
इंसानियत
का
हो
चुका
व्यापार
है
ये
तो
तिरी
है
ज़िन्दगी
ये
शान
है
क्यूँ
ज़ुल्म
के
आगे
झुकी
दस्तार
है
जो
प्यार
है
मक्कार
है
बेकार
है
मैं
हूँ
मुसव्विर
वो
मिरा
शहकार
है
हर
वक़्त
है
माहौल
बस
इक
जंग
का
ऐसी
सियासत
से
भरी
सरकार
है
ग़ज़लें
मेंरी
ये
जान
हैं
'सलमा'
मगर
ये
शा'इरी
ही
तो
मेरा
मेआर
है
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Salma Malik
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यही
वो
वक़्त
है
जो
आज
हम
बर्बाद
करते
हैं
यही
वो
वक़्त
है
जो
लौटकर
वापस
नहीं
आता
Salma Malik
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