saansen hain zindagi to hai zinda-dili nahin | साँसें हैं, ज़िन्दगी तो है, ज़िंदा-दिली नहीं,

  - Haider Khan
साँसेंहैं,ज़िन्दगीतोहै,ज़िंदा-दिलीनहीं,
इसदीपमेंधुआँहैबसअब,रौशनीनहीं।
उनकीकहानियोंमेंहमेशाबुराथामैं,
मेरीमेंउनसेअच्छाकोईशख़्सहीनहीं।
अबवक़्तनेबदललीहैकरवटतोक्याकरें,
वरनावोआश्नाथेकभी,अजनबीनहीं।
यातोबनाकेअपनारखोयारिहाकरो,
येक्याकीहमसेेइश्क़कभीहैकभीनहीं।
खोयाथाइसक़दरमैंख़यालोंमेंपिछलीशब,
वोकेजाचुकेमुझेएहसासभीनहीं।
येतोकहाथाउसनेकिगौहरहोतुममगर,
येभीकहाथासाथमेंकिक़ीमतीनहीं।
उनसेेबिछड़तेवक़्तयेमालूमथामुझे,
पहलामक़ामथायेमिराआख़रीनहीं।
मैंजबगयाथाउसकोमनानेकेवास्ते,
उसनेकहायेहिज्रहैनाराज़गीनहीं।
कुछलोगटूटतेहैंतोसजदोंमेंगिरतेहैं,
हरशख़्समय-कशीहीकरे,लाज़मीनहीं।
यूँँतोमिरीमज़ारपेआएथेसबमगर,
जिसकेलिएमरेथेहमआयावहीनहीं।
उनसेेकलरहीथीकिसीऔरकीमहक,
औरवोमहककुछऔरहीथीदोस्तीनहीं।
मेरेबग़ैरख़ुशथीवोकिसनेयेकहदिया,
ऐसाहीथाअगरतोवोफिरलौटतीनहीं।
  - Haider Khan
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