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ABhishek Parashar
zindagi ko chidhaa raha hooñ main
zindagi ko chidhaa raha hooñ main | ज़िंदगी को चिढ़ा रहा हूँ मैं
- ABhishek Parashar
ज़िंदगी
को
चिढ़ा
रहा
हूँ
मैं
इस
लिए
मुस्कुरा
रहा
हूँ
मैं
शे'र
उस
के
लिए
लिखा
था
जो
आइने
को
सुना
रहा
हूँ
मैं
- ABhishek Parashar
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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तंग
आ
चुके
हैं
कशमकश-ए-ज़िंदगी
से
हम
ठुकरा
न
दें
जहाँ
को
कहीं
बे-दिली
से
हम
Sahir Ludhianvi
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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वो
मेरी
ज़िन्दगी
का
आख़िरी
ग़म
था
उसी
ने
मुझको
ख़ुश
रहना
सिखाया
है
Sapna Moolchandani
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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मैं
सचमुच
मुस्कुराने
लग
गया
था
मिरा
ग़म
भी
ठिकाने
लग
गया
था
मुझे
लड़की
मिली
थी
अप्सरा
सी
मैं
भी
ख़ुद
को
भुलाने
लग
गया
था
मोहब्बत
हो
गई
थी
देख
उस
को
मैं
भी
सपने
सजाने
लग
गया
था
वो
मेरे
पास
आकर
क्या
गई
थी
उसे
अपना
बताने
लग
गया
था
मुझे
वो
छोड़
कर
जब
जा
रही
थी
मैं
अपना
मुँह
फुलाने
लग
गया
था
कि
यारो
खींच
कर
तस्वीर
हँसती
मैं
ग़म
अपने
छुपाने
लग
गया
था
कि
कहना
भी
नहीं
था
शे'र
उस
पर
मगर
ग़ज़लें
सुनाने
लग
गया
था
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ABhishek Parashar
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उदासी
बेच
कर
मैं
फूल
लाया
था
बहुत
दिन
बाद
खुल
कर
मुस्कुराया
था
उदासी
और
ग़म
ने
जो
सिखाया
था
वही
मैंने
ख़ुशी
पर
आज़माया
था
उतर
कर
आसमाँ
से
अजनबी
कोई
मेरी
ख़ातिर
ज़मीं
पर
इश्क़
लाया
था
हज़ारों
लड़कियाँ
थीं
दिल
लगाने
को
मेरा
दिल
बे-वफ़ा
लड़की
पे
आया
था
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ABhishek Parashar
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मोहब्बत
तो
नहीं
करती
किसी
से
वो
यक़ीनन
जिस्म
का
व्यापार
करती
है
ABhishek Parashar
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हो
मुलाक़ातें
मोहब्बत
में
किसी
से
मेरा
दिल
भी
यार
उलफ़त
चाहता
है
ABhishek Parashar
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लगाओ
आग
दिल
में
फिर
मोहब्बत
की
कि
फिर
से
फ़रवरी
जो
आ
रही
है
दोस्त
ABhishek Parashar
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