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ABhishek Parashar
udaasi bech kar main phool laaya tha
udaasi bech kar main phool laaya tha | उदासी बेच कर मैं फूल लाया था
- ABhishek Parashar
उदासी
बेच
कर
मैं
फूल
लाया
था
बहुत
दिन
बाद
खुल
कर
मुस्कुराया
था
उदासी
और
ग़म
ने
जो
सिखाया
था
वही
मैंने
ख़ुशी
पर
आज़माया
था
उतर
कर
आसमाँ
से
अजनबी
कोई
मेरी
ख़ातिर
ज़मीं
पर
इश्क़
लाया
था
हज़ारों
लड़कियाँ
थीं
दिल
लगाने
को
मेरा
दिल
बे-वफ़ा
लड़की
पे
आया
था
- ABhishek Parashar
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उस
की
बेचैनी
बढ़ाना
चाहती
हूँ
सुनिए
कह
कर
चुप
लगाना
चाहती
हूँ
Pooja Bhatia
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अज़ल
से
ले
कर
के
आज
तक
मैं
कभी
भी
तन्हा
नहीं
रहा
हूँ
कभी
थे
तुम
तो,
कभी
थी
दुनिया,
कभी
ये
ग़ज़लें,
कभी
उदासी
Ankit Maurya
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कोई
दीवाना
कहता
है
कोई
पागल
समझता
है
मगर
धरती
की
बेचैनी
को
बस
बादल
समझता
है
Kumar Vishwas
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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मैं
वो
नाकाम
मुसव्विर
हूँ
जो
ख़ुद
के
हाथों
एक
उदासी
के
सिवा
कुछ
न
बना
पाया
है
Ashutosh Vdyarthi
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तुम्हारी
एक
हरकत
से
उदासी
आए
चेहरे
पर
किसी
को
इस
तरह
भी
मत
करो
लाचार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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उदासी
का
सबब
उस
सेे
जो
हम
तब
पूछ
लेते
वजह
फिर
पूछनी
पड़ती
न
शायद
ख़ुद-कुशी
की
Dipendra Singh 'Raaz'
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मेरी
बरसों
की
उदासी
का
सिला
कुछ
तो
मिले
उस
से
कह
दो
वो
मेरा
क़र्ज़
चुकाने
आए
Khalil Ur Rehman Qamar
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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हमें
अपना
बनाने
में
लगे
हैं
हमारी
जान
खाने
में
लगे
हैं
नए
को
छोड़
कर
फिर
से
सभी
दोस्त
यहाँ
आ
कर
पुराने
में
लगे
हैं
हुए
हैं
दोस्त
हम
मशहूर
जब
से
हमें
अपना
बताने
में
लगे
हैं
हुए
थे
दूर
जो
मुफ़्लिस
बता
कर
वही
सिगरेट
लाने
में
लगे
हैं
मियाँ
इक
दौर
वो
था
ख़ैर
अब
तो
सभी
ग़लती
छुपाने
में
लगे
हैं
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ABhishek Parashar
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याद
से
अब
उस
की
राहत
चाहता
है
मेरा
दिल
भी
अब
रफ़ाक़त
चाहता
है
ABhishek Parashar
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इक
परी
ने
बचा
लिया
वरना
ये
उदासी
तो
मार
देती
मुझे
ABhishek Parashar
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रात
को
थक
के
सोता
है
दिन
और
दिन
में
आराम
रात
करती
है
ABhishek Parashar
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ढूँढ़
लेना
इश्क़
करने
का
बहाना
दिल
करे
तो
तुम
किसी
से
दिल
लगाना
कुछ
कहानी
और
कुछ
क़िस्से
बनाना
सच
है
कह
कर
अपने
यारों
को
सुनाना
कोई
ठुकरा
दे
तुम्हें
तो
कुछ
न
कहना
बस
ज़रा
सा
मुस्कुराकर
लौट
आना
कुछ
नया
लिखना
नए
कुछ
शे'र
कहना
सब
को
अपनी
दास्ताँ
गा
कर
सुनाना
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ABhishek Parashar
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