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ABhishek Parashar
use dekhe bina haan kaise boluun
use dekhe bina haan kaise boluun | उसे देखे बिना हाँ कैसे बोलूँ
- ABhishek Parashar
उसे
देखे
बिना
हाँ
कैसे
बोलूँ
बितानी
ज़िंदगी
है
देखते
हैं
- ABhishek Parashar
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ज़िंदगी
एक
कहानी
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
लोग
किरदार
निभाते
हुए
मर
जाते
हैं
Malikzada Javed
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तुम्हें
भी
साँस
लेने
की
कमी
हो
तुम्हें
भी
ज़िंदगी
ठुकरा
के
जाए
Ambar
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ये
मेरी
ज़िद
ही
ग़लत
थी
कि
तुझ
सेा
बन
जाऊँ
मैं
अब
न
अपनी
तरह
हूँ
न
तेरे
जैसा
हूँ
हमारे
बीच
ज़माने
की
बदगुमानी
है
मैं
ज़िंदगी
से
ज़रा
कम
ही
बात
करता
हूँ
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Subhan Asad
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कीजे
इज़हार-ए-मोहब्बत
चाहे
जो
अंजाम
हो
ज़िंदगी
में
ज़िंदगी
जैसा
कोई
तो
काम
हो
Priyamvada ilhan
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बहन
ने
बाँध
कर
राखी
बचा
ली
ज़िंदगी
वर्ना
ज़रा
सा
वक़्त
बाक़ी
था
हमारी
नब्ज़
थमने
में
Harsh saxena
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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कटती
है
आरज़ू
के
सहारे
पे
ज़िंदगी
कैसे
कहूँ
किसी
की
तमन्ना
न
चाहिए
Shaad Arfi
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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मुझे
फुर्सत
नहीं
अब
वाक़ई
में
बहुत
मसरूफ
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
में
Reshma Shaikh
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तेरे
आगे
ज़माना
कुछ
नहीं
है
मेरी
नज़रों
में
दुनिया
कुछ
नहीं
है
मुझे
हर
बार
धोखा
ही
मिला
है
मगर
दिल
है
समझता
कुछ
नहीं
है
ज़रूरत
साथ
ले
आई
है
वरना
हमारे
बीच
रिश्ता
कुछ
नहीं
है
बहुत
ता'रीफ़
करता
है
वो
उसकी
मगर
वो
उसपे
लिखता
कुछ
नहीं
है
सभी
से
इश्क़
करता
फिर
रहा
है
मगर
वो
करता
धरता
कुछ
नहीं
है
मेरी
वीरान
सी
इस
ज़िंदगी
में
उदासी
के
अलावा
कुछ
नहीं
है
वो
भी
पैसे
कमाते
फिर
रहे
हैं
जो
कहते
थे
कि
पैसा
कुछ
नहीं
है
मोहब्बत
करने
तो
तुम
जा
रहे
हो
मियाँ
पर
इस
में
रक्खा
कुछ
नहीं
है
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ABhishek Parashar
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लगा
कर
किसी
ग़ैर
से
दिल
मिरी
जान
दिल
को
दुखाती
बहुत
है
यही
सोचता
हूँ
उसे
भूल
जाऊँ
मगर
याद
आती
बहुत
है
ABhishek Parashar
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जिन
आँखों
में
नींद
भी
आने
से
डरती
है
उन
आँखों
में
क्या
आएँगे
ख़्वाब
तुम्हारे
ABhishek Parashar
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बंद
कमरे
में
पड़ा
रहता
हूँ
मैं
अपने
ग़म
और
अपनी
तन्हाई
लिए
ABhishek Parashar
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शब-ए-ग़म
से
बड़ा
बेचैन
हूँ
मैं
ख़यालों
में
मिरे
बस
ख़ुद-कुशी
है
ABhishek Parashar
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