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ABhishek Parashar
tere aage zamaana kuchh nahin hai
tere aage zamaana kuchh nahin hai | तेरे आगे ज़माना कुछ नहीं है
- ABhishek Parashar
तेरे
आगे
ज़माना
कुछ
नहीं
है
मेरी
नज़रों
में
दुनिया
कुछ
नहीं
है
मुझे
हर
बार
धोखा
ही
मिला
है
मगर
दिल
है
समझता
कुछ
नहीं
है
ज़रूरत
साथ
ले
आई
है
वरना
हमारे
बीच
रिश्ता
कुछ
नहीं
है
बहुत
ता'रीफ़
करता
है
वो
उसकी
मगर
वो
उसपे
लिखता
कुछ
नहीं
है
सभी
से
इश्क़
करता
फिर
रहा
है
मगर
वो
करता
धरता
कुछ
नहीं
है
मेरी
वीरान
सी
इस
ज़िंदगी
में
उदासी
के
अलावा
कुछ
नहीं
है
वो
भी
पैसे
कमाते
फिर
रहे
हैं
जो
कहते
थे
कि
पैसा
कुछ
नहीं
है
मोहब्बत
करने
तो
तुम
जा
रहे
हो
मियाँ
पर
इस
में
रक्खा
कुछ
नहीं
है
- ABhishek Parashar
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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जनमदिन
हिज्र
का
कुछ
यूँँ
मनाया
किया
अनब्लॉक
तुमको
आज
हमने
Tanoj Dadhich
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वो
बे-वफ़ा
है
तो
क्या
मत
कहो
बुरा
उसको
कि
जो
हुआ
सो
हुआ
ख़ुश
रखे
ख़ुदा
उसको
Naseer Turabi
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दिल
अभी
पूरी
तरह
टूटा
नहीं
दोस्तों
की
मेहरबानी
चाहिए
Abdul Hamid Adam
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ईद
का
दिन
तो
है
मगर
'जाफ़र'
मैं
अकेले
तो
हँस
नहीं
सकता
Jaafar Sahni
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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काट
पाऊँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
तेरे
बग़ैर
तीन
दिन
का
हिज्र
मुझ
को
लग
रहा
है
तीन
साल
Afzal Ali Afzal
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सँभलता
हूँ
तो
ये
लगता
है
जैसे
तुम्हारे
साथ
धोखा
कर
रहा
हूँ
Shariq Kaifi
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लो
फिर
तिरे
लबों
पे
उसी
बे-वफ़ा
का
ज़िक्र
अहमद-'फ़राज़'
तुझ
से
कहा
ना
बहुत
हुआ
Ahmad Faraz
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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रात
को
सोते
हुए
इक
ख़्वाब
आया
था
मुझे
चूम
कर
तुम
ने
गले
से
फिर
लगाया
था
मुझे
ABhishek Parashar
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वो
मेरा
जन्मदिन
तो
भूल
जाती
है
उसे
झगड़ा
हमारा
याद
रहता
है
ABhishek Parashar
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लगा
था
तब
से
मैं
ख़ुद
की
मरम्मत
में
ये
दिल
टूटा
था
जब
पहली
मोहब्बत
में
बता
कब
तक
मिलेंगे
ख़्वाब
में
दोनों
कभी
तो
रू-ब-रू
आ
तू
हक़ीक़त
में
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ABhishek Parashar
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मोहब्बत
अब
मेरी
नज़रें
चुराती
है
सही
ख़ुद
को
ग़लत
मुझको
बताती
है
यक़ीं
तेरा
करेगा
कौन
मेरी
जान
ख़बर
सबको
है
तू
बातें
बनाती
है
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ABhishek Parashar
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अरे
जाओ
मियाँ
हम
इश्क़
वाले
हैं
यहाँ
पे
हुस्न
का
सिक्का
नहीं
चलता
ABhishek Parashar
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