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ABhishek Parashar
tumhein itnaa bura kyuuñ lag raha hai
tumhein itnaa bura kyuuñ lag raha hai | तुम्हें इतना बुरा क्यूँ लग रहा है
- ABhishek Parashar
तुम्हें
इतना
बुरा
क्यूँ
लग
रहा
है
मैं
उसके
साथ
थोड़ा
रह
लिया
तो
- ABhishek Parashar
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अँधेरों
में
भले
ही
साथ
छोड़ा
था
हमारा
मगर
जब
रौशनी
लौटी
तो
साए
लौट
आए
Vikas Sahaj
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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क्यूँँ
चलते
चलते
रुक
गए
वीरान
रास्तो
तन्हा
हूँ
आज
मैं
ज़रा
घर
तक
तो
साथ
दो
Adil Mansuri
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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फिरता
है
कैसे-कैसे
सवालों
के
साथ
वो
उस
आदमी
की
जामातलाशी
तो
लीजिए
Dushyant Kumar
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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हो
मुलाक़ातें
मोहब्बत
में
किसी
से
मेरा
दिल
भी
यार
उलफ़त
चाहता
है
ABhishek Parashar
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मोहब्बत
हम
उसी
से
कर
के
बैठे
हैं
ख़ुदा
ने
जिस
को
क़िस्मत
में
नहीं
लिक्खा
ABhishek Parashar
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कभी
कभार
उसे
मुझपे
प्यार
आता
है
कभी
कभार
तो
वो
खुल
के
मुस्कुराती
है
ABhishek Parashar
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मुझे
बस
रात
से
उम्मीद
रहती
है
उजाले
दिन
के
अब
अच्छे
नहीं
लगते
ABhishek Parashar
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लगाओ
आग
दिल
में
फिर
मोहब्बत
की
कि
फिर
से
फ़रवरी
जो
आ
रही
है
दोस्त
ABhishek Parashar
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