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ABhishek Parashar
nahin aasaan itnaa bhool paana jaañ
nahin aasaan itnaa bhool paana jaañ | नहीं आसान इतना भूल पाना जाँ
- ABhishek Parashar
नहीं
आसान
इतना
भूल
पाना
जाँ
वगरना
हम
तुझे
कब
का
भुला
देते
- ABhishek Parashar
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तुम्हें
हुस्न
पर
दस्तरस
है
मोहब्बत
वोहब्बत
बड़ा
जानते
हो
तो
फिर
ये
बताओ
कि
तुम
उस
की
आँखों
के
बारे
में
क्या
जानते
हो
ये
जुग़राफ़िया
फ़ल्सफ़ा
साईकॉलोजी
साइंस
रियाज़ी
वग़ैरा
ये
सब
जानना
भी
अहम
है
मगर
उस
के
घर
का
पता
जानते
हो
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Tehzeeb Hafi
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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इश्क़
माशूक़
इश्क़
'आशिक़
है
यानी
अपना
ही
मुब्तला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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कहाँ
तक
साथ
दोगी
तुम
हमारा
सनम
जावेदाँ
है
यह
ग़म
हमारा
Avtar Singh Jasser
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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मैंने
अपनी
ग़ज़लें
खारिज
कर
डाली
सोचो
मेरी
जान
तुम्हारा
क्या
होगा
Talib Toofani
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मिरा
छिप
कर
वो
भी
दीदार
करती
है
मियाँ
लगता
है
वो
भी
प्यार
करती
है
मगर
जब
देखता
हूँ
तो
नज़रंदाज़
मुझे
क्यूँँ
दोस्त
वो
हर
बार
करती
है
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ABhishek Parashar
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ख़ुदास
चाँद
से
फ़रियाद
करते
हैं
तुम्हें
दिन
रात
इतना
याद
करते
हैं
ABhishek Parashar
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मुझे
इस
बात
का
अब
ग़म
रहेगा
तू
मेरे
साथ
थोड़ा
कम
रहेगा
बिछड़कर
मुझ
सेे
ग़ैरों
से
मिलेगा
फ़क़त
दो
चार
दिन
मातम
रहेगा
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ABhishek Parashar
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मैं
क्या
कहूँ
कि
मुझे
नींद
क्यूँ
नहीं
आती
किसी
की
याद
है
जो
रात-भर
सताती
है
कोई
हसीन
तमन्ना
है
मेरे
दिल
की
और
वही
तमन्ना
मुझे
रात-भर
रुलाती
है
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ABhishek Parashar
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फ़ाइदा
मेरा
उठा
कर
छोड़
देना
तुम
भी
मुझको
आज़मा
कर
छोड़
देना
मैंने
चाहा
है
बड़ी
शिद्दत
से
तुमको
सो
मुझे
अपना
बना
कर
छोड़
देना
जब
तुझे
जाना
हो
मुझको
छोड़
कर
तो
बे-वफ़ा
मुझको
बता
कर
छोड़
देना
फिर
कभी
तू
याद
भी
मुझको
न
आए
इस
तरह
से
दिल
दुखा
कर
छोड़
देना
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ABhishek Parashar
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