zakham par marham laga kar dekhte hain | ज़ख़्म पर मरहम लगा कर देखते हैं

  - ABhishek Parashar
ज़ख़्मपरमरहमलगाकरदेखतेहैं
हमउसेफिरसेमनाकरदेखतेहैं
मन्नतोंसेकुछनहींहोसकता'अभिषेक'
चलउसेसमझा-बुझाकरदेखतेहैं
हैयक़ींधोखाहीदेगीवोमुझेपर
इश्क़हैसोआज़माकरदेखतेहैं
चंदग़ज़लोंकेसहारेसेउसेहम
आजहाल-ए-दिलसुनाकरदेखतेहैं
वोहमेंजब-जबअकेलाछोड़तीहै
दर्दहोताहैबताकरदेखतेहैं
पूछतीहैवोमुझेक्यादेसकोगे
दिलउसेअपनादिखाकरदेखतेहैं
गरमोहब्बतहैतुम्हेंतोबोलो,हमफिर
चाँदतारेभीचुराकरदेखतेहैं
  - ABhishek Parashar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy