mere zakhm nahin bharte yaaron | मेरे ज़ख़्म नहीं भरते यारों

  - Tehzeeb Hafi
मेरेज़ख़्मनहींभरतेयारों
मेरेनाखूनबढ़तेजातेहैं
मैंतन्हापेड़हूँजंगलका
मेरेपत्तेझड़तेजातेहैं
मैंकौनहूँ,क्याहूँ,कबकीहूँ
एकतेरीकबहूँ,सबकीहूँ
मैंकोयलहूँशहराओकी
मुझेताबनहींहैछांवकी
एकदलदलहैतेरेवादोंकी
मेरेपैरउखड़तेजातेहैं
मेरेज़ख़्मनहींभरतेयारो
मेरेनाखूनबढ़तेजातेहैं
मैंकिसबच्चेकीगुड़ियाथी
मैंकिसपिंजरेकीचिड़ियाथी
मेरेखेलनेवालेकहाँगए
मुझेचूमनेवालेकहाँगए
मेरेझुमकेगिरवीमतरखना
मेरेकंगनतोड़नादेना
मैंबंजरहोतीजातीहूँ
कहींदरियामोड़नादेना
कभीमिलनाइसपरसोचेंगे
हमक्यामंजिलपरपहुंचेंगे
रास्तोंमेंहीलड़तेजातेहैं
मेरेज़ख़्मनहींभरतेयारों
मेरेनाखूनबढ़तेजातेहैं
  - Tehzeeb Hafi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy