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Taj Bhopali
har dard se baandhe hue rishta koi guzre
har dard se baandhe hue rishta koi guzre | हर दर्द से बाँधे हुए रिश्ता कोई गुज़रे
- Taj Bhopali
हर
दर्द
से
बाँधे
हुए
रिश्ता
कोई
गुज़रे
क़ातिल
कोई
गुज़रे
न
मसीहा
कोई
गुज़रे
आईना
ब-हर-राह-गुज़र
बन
गईं
आँखें
इक
उम्र
से
बैठे
हैं
कि
तुम
सा
कोई
गुज़रे
वो
तिश्नगी-ए-जाँ
है
कि
सहरा
को
तरस
आए
अब
होंटों
को
छूता
हुआ
दरिया
कोई
गुज़रे
उन
से
भी
इलाज-ए-ग़म
पिन्हाँ
नहीं
होगा
कह
दें
जो
अगर
उन
का
शनासा
कोई
गुज़रे
- Taj Bhopali
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ज़िक्र
तुम्हारा
बहुत
ज़रूरी
इन
ग़ज़लों
में
जानेमन
चाय
बिना
अदरक
को
डाले
अच्छी
थोड़ी
बनती
है
Tanoj Dadhich
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पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ
था
हर
नग़्मा-ए-कृष्ण
बाँसुरी
का
Hasrat Mohani
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शब
भर
इक
आवाज़
बनाई
सुब्ह
हुई
तो
चीख़
पड़े
रोज़
का
इक
मामूल
है
अब
तो
ख़्वाब-ज़दा
हम
लोगों
का
Abhishek shukla
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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भेज
देता
हूँ
मगर
पहले
बता
दूँ
तुझ
को
मुझ
से
मिलता
नहीं
कोई
मिरी
तस्वीर
के
बाद
Umair Najmi
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
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तकल्लुफ़
छोड़कर
आओ
उसे
फिर
से
जिया
जाए
हमारा
बचपना
जो
एल्बमों
में
क़ैद
रहता
है
Shiva awasthi
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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ये
जो
कुछ
आज
है
कल
तो
नहीं
है
ये
शाम-ए-ग़म
मुसलसल
तो
नहीं
है
मैं
अक्सर
रास्तों
पर
सोचता
हूँ
ये
बस्ती
कोई
जंगल
तो
नहीं
है
यक़ीनन
तुम
में
कोई
बात
होगी
ये
दुनिया
यूँँही
पागल
तो
नहीं
है
मैं
लम्हा
लम्हा
मरता
जा
रहा
हूँ
मिरा
घर
मेरा
मक़्तल
तो
नहीं
है
किसी
पर
छा
गया
बरसा
किसी
पर
वो
इक
आवारा
बादल
तो
नहीं
है
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Taj Bhopali
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दिल
तेरी
नज़र
की
शह
पा
कर
मिलने
के
बहाने
ढूँढे
है
गीतों
की
फ़ज़ाएँ
माँगे
है
ग़ज़लों
के
ज़माने
ढूँढे
है
आँखों
में
लिए
शबनम
की
चमक
सीने
में
लिए
दूरी
की
कसक
वो
आज
हमारे
पास
आ
कर
कुछ
ज़ख़्म
पुराने
ढूँढे
है
क्या
बात
है
तेरी
बातों
की
लहजा
है
कि
है
जादू
कोई
हर
आन
फ़ज़ा
में
दिल
उड़
कर
तारों
के
ख़ज़ाने
ढूँढे
है
पहले
तो
छुटे
ये
दैर-ओ-हरम
फिर
घर
छूटा
फिर
मय-ख़ाना
अब
'ताज'
तुम्हारी
गलियों
में
रोने
के
ठिकाने
ढूँढे
है
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Taj Bhopali
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तुम्हें
कुछ
भी
नहीं
मालूम
लोगों
फ़रिश्तों
की
तरह
मासूम
लोगों
Taj Bhopali
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दिल
तेरी
नज़र
की
शह
पा
कर
मिलने
के
बहाने
ढूँढे
है
गीतों
की
फ़ज़ाएँ
माँगे
है
ग़ज़लों
के
ज़माने
ढूँढे
है
आँखों
में
लिए
शबनम
की
चमक
सीने
में
लिए
दूरी
की
कसक
वो
आज
हमारे
पास
आ
कर
कुछ
ज़ख़्म
पुराने
ढूँढे
है
क्या
बात
है
तेरी
बातों
की
लहजा
है
कि
है
जादू
कोई
हर
आन
फ़ज़ा
में
दिल
उड़
कर
तारों
के
ख़ज़ाने
ढूँढे
है
पहले
तो
छुटे
ये
दैर-ओ-हरम
फिर
घर
छूटा
फिर
मय-ख़ाना
अब
'ताज'
तुम्हारी
गलियों
में
रोने
के
ठिकाने
ढूँढे
है
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Taj Bhopali
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दिल
को
कोई
आज़ार
तो
होता
अपना
कोई
ग़म-ख़्वार
तो
होता
सहरा
भी
कर
लेते
गवारा
ज़िक्र-ए-दर-ओ-दीवार
तो
होता
साया-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार
नहीं
था
साया-ए-याद-ए-यार
तो
होता
आँखों
से
कुछ
ख़ून
ही
बहता
वो
दामन
गुल-कार
तो
होता
लाख
तुलू-ए-मेहर
थे
लेकिन
कोई
शब-बेदार
तो
होता
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Taj Bhopali
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