gham-e-jaanaan jahaan likkha gaya hai | ग़म-ए-जानाँ जहाँ लिक्खा गया है

  - Tahzeeb Abrar
ग़म-ए-जानाँजहाँलिक्खागयाहै
वहींपरराएगाँलिक्खागयाहै
जहाँआबादहैयादोंकीबस्ती
उसीकोदश्त-ए-जाँलिक्खागयाहै
सितमअपनोंकेज़ाहिरहोगएहैं
मिरादर्द-ए-निहाँलिक्खागयाहै
मैंअपनेहीमुक़द्दरमेंनहींहूँ
मुझेआख़िरकहाँलिक्खागयाहै
तिरेक़ुर्बानमेरीफ़िक्र-ए-मुसबत
नहींलिखनाथाहाँलिक्खागयाहै
वोमेरीख़ामुशीसेडररहेहैं
जिन्हेंअहल-ए-ज़बाँलिक्खागयाहै
सिलायेतुझमेंरहनेकाहैशायद
मुझेजोबे-मकाँलिक्खागयाहै
  - Tahzeeb Abrar
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